खसरा-रूबेला उन्मूलन अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण है ग्रामीण चिकित्सकों की भूमिका

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर।<&sol;strong> à¤•िसी भी रोग को नियंत्रित करने व इसे पूरी तरह खत्म करने में स्थानीय स्तर पर लोगों को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने वाले प्रैक्टिशनर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। स्वास्थ्य संबंधी किसी तरह की परेशानी होने पर अधिकांश लोग सबसे पहले इन्हीं चिकित्सकों के पास पहुंचते हैं। रोग उन्मूलन संबंधी प्रयासों में लोकल प्रैक्टिशनर की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हुए अब जिले में पोलिया&comma; खसरा-रूबेला&comma; गलघोटू&comma; नवजात टेटनस व टीबी जैसे रोगों के उन्मूलन को लेकर किये जा रहे प्रयासों में लोकल प्रैक्टिशनर की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर डब्ल्यूएचओ के तत्वावधान में विशेष कार्यशाला आयोजित कर स्थानीय चिकित्सकों को रोग संबंधी लक्षण&comma; नियंत्रण संबंधी उपाय व संबंधित लक्षण वाले मरीजों का सर्विलांस व रिर्पोटिंग के प्रति अधिक संवेनशील बनाने को लेकर जरूरी पहल की जा रही है। इसी कड़ी में पलासी प्रखंड के धर्मगंज एपीएचसी में एएफपी व वीपीडी विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी स्थानीय मेडिकल प्रैक्टिशनर ने भाग लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>एमआर उन्मूलन राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शुमार<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ शुभान अली ने बताया कि किसी भी रोग को पूर्णत&colon; खत्म करने में सर्विलांस व रोगियों की खोज जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक दुनिया में कहीं भी किसी व्यक्ति के शरीर में पोलियो के विषाणु मौजूद हैं&comma;तो अन्य देशों में इसके प्रसार का खतरा बना रहेगा।इसलिये ये जरूरी है कि किसी व्यक्ति में इससे जुड़े किसी भी तरह का लक्षण दिखने पर स्वास्थ्य विभाग को इसकी तत्काल सूचना उपलब्ध कराई जाये। खसरा व रूबेला उन्मूलन को लेकर किये जा रहे प्रयासों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये भी ये बेहद जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> उन्होंने कहा कि खसरा व रूबेला यानी एमआर का उन्मूलन राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शुमार है। इसे लेकर लोकल प्रैक्टिशनर को सेंसटाइज किया जाना जरूरी है&comma;जो इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है। डब्ल्यूएचओ के आरआरटी जुनैद सफत ने बताया कि खसरा व रूबेला को एक सुरक्षित व प्रभावी टीके की केवल दो खुराक से रोका जा सकता है। इसलिये अग्रिम पंक्ति में खड़े स्वास्थ्य कर्मियों को इसके प्रति अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है। ताकि सक्रिय मामले की खोज में वृद्धि के साथ-साथ रिपोर्टिंग नेटवर्क का विस्तार&comma; संभावित मामलों पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित कराया जा सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>रोग उन्मूलन में लोकल प्रैक्टिशनर की भूमिका महत्वपूर्ण<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि किसी रोग को जड़ से खत्म करने में रोगियों की खोज महत्वपूर्ण है। संभावित रोगियों की खोज में लोकल प्रैक्टिशनर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। किसी बच्चे में रोग से संबंधित किसी तरह का लक्षण दिखने पर स्वास्थ्य विभाग व डब्ल्यूएचओ को इसकी तत्काल सूचना उपलब्ध कराना जरूरी है। ताकि संबंधित मामले का समुचित जांच सुनिश्चित कराया जा सके। रोग संबंधी मामला सामने आने पर नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देते हुए रोग नियंत्रण संबंधी अन्य प्रभावी उपायों पर सख्ती पूर्वक अमल करते हुए रोग को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;

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