फाइलेरिया जैसी बीमारी को जड़ से मिटाने में जनजागरूकता अभियान की भूमिका अतिमहत्वपूर्ण

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पूर्णिया&lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> फाइलेरिया जैसी बीमारी को पूरे विश्व में दूसरे नंबर की बीमारी माना जाता है&comma; क्योंकि यही एक ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को विकलांग बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लिंफेटिक फाइलेरियासिस को ही आम बोलचाल की भाषा में फाइलेरिया कहा जाता है। हालांकि फाइलेरिया किसी की ज़िंदगी तो नहीं लेती है&comma; लेकिन जिंदा आदमी को मृत समान बना देती। इस बीमारी को हाथीपांव के नाम से भी जाना जाता है। अगर समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए तो जल्द ही इससे छुटकारा पाया जा सकता है। फाइलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत हाथीपांव एवं हाइड्रोसील से ग्रसित मरीज़ों के लिए जिले के अधिकांश स्वास्थ्य संस्थानों में फाइलेरिया क्लीनिक का शुभारंभ हो चुका है। तकनीकी कारणों से जहां नहीं खुला है वहां बहुत ही जल्द शुरू कर दिया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>स्वास्थ्य विभाग को अन्य सहयोगी संस्थाओं का सहयोग अपेक्षित&colon; सिविल सर्जन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि फाइलेरिया बीमारी से बचाव एवं सुरक्षित रहने के लिए जन जागरूकता बहुत जरूरी होता है। क्योंकि जब तक हमलोग जागरूक नही होंगे तब तक किसी को कार्य या बीमारी को जड़ से मिटा नहीं सकते हैं। इसके लिए जन-जागरूकता अभियान के साथ ही प्रचार-प्रसार में तेज़ी लाने के लिए सहयोगी संस्थाओं का सहयोग भी अपेक्षित है। हालांकि जिले में विश्व स्वास्थ्य संगठन &lpar;डब्ल्यूएचओ&rpar;&comma; केयर इंडिया एवं सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च &lpar;सीफार&rpar; के अधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में अपेक्षा से अधिक सहयोग मिल रहा है। जिस कारण इस अभियान को मिटाने में हमलोगों का प्रदर्शन काफ़ी अच्छा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>जिले में 6669 फाइलेरिया मरीज़ों की हुई पहचान&colon; डॉ आरपी मंडल<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>जिला वेक्टर बॉर्न पदाधिकारी डॉ राजेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि फ़िलहाल पूर्णिया जिले में 6669 फाइलेरिया के मरीज़ों को चिह्नित किया गया है। जिसमें 5217 हाथीपांव और 1452 हाईड्रोसील के मरीज हैं। हालांकि अभी तक 171 हाइड्रोसील बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया जा चुका है। फाइलेरिया बीमारियों में शामिल हाथीपांव &lpar;लिम्फोडिमा&rpar; को 7 चरणों में विभक्त किया गया है। हालांकि शुरुआती दौर में 12 स्टेज तक के मरीज को फिर से सामान्य अवस्था में लाया जा सकता है। लेकिन स्टेज बढ़ जाने पर कभी भी यह बीमारी ठीक नहीं हो सकती है। आमतौर पर फाइलेरिया का कोई स्पष्ट रूप से लक्षण दिखाई नहीं देता है। लेकिन बुखार&comma; पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द के साथ ही सूजन की समस्या दिखाई देती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों को उपलब्ध करा दी गयी 980 स्वउपचार किट&colon; डीवीबीसीओ<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>जिला वेक्टर जनित नियंत्रण पदाधिकारी &lpar;डीवीबीसीओ&rpar;<br>रवि नंदन सिंह ने बताया कि फाइलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत हाथीपांव से ग्रसित मरीज़ों के लिए 980 स्वउपचार किट की आपूर्ति ज़िले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को करा दी गई है। जिसमें पूर्णिया पूर्व को 130&comma; डगरुआ को 60&comma; बायसी को 40&comma; अमौर को 65&comma; बैसा को 40&comma; कसबा को 70&comma; जलालगढ़ को 60&comma; श्री नगर को 60&comma; के नगर को 60&comma; बी कोठी को 70&comma; बनमनखी को 80&comma; भवानीपुर को 60&comma; धमदाहा को 60&comma; रुपौली को 60 जबकि फाइलेरिया नियंत्रण इकाई को 65 स्वउपचार किट उपलब्ध करा दी गयी है। उसका वितरण फाइलेरिया क्लिनिक में आने वाले हाथीपांव से ग्रसित व्यक्तियों में किया जाना है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फाइलेरिया जैसी बीमारी से बचाव एवं सुरक्षित रहने के तरीके&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>-फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है&comma; इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर के आस-पास एवं अंदर साफ-सफाई रखें।<br>-पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। पूरे बाजू के कपड़े पहनकर रहें।<br>-सोते वक्त अपने हाथों&comma; पैरों या अन्य खुले भागों पर शुद्ध सरसो या नीम के तेल को लगा लें।<br>-हाथ या पैर में कही चोट लगी हो या घाव हो तो उसकी पूरी तरह से सफ़ाई करें।<br>-साबुन से धोएं और फिर पानी सुखाकर दवाई लगा लें।<&sol;p>&NewLine;

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