हरे कृष्ण-हरे राम के जयघोष से गूंज रहा कथा परिसर, रुक्मिणी-कृष्ण विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित। <&sol;strong>राजधानी पटना के पूर्वी आशोचक मोहल्ला में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा इन दिनों श्रद्धा&comma; भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनी हुई है&period; कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर रहे हैं&period; हरे कृष्ण&comma; हरे राम के गगनभेदी जयघोष और भजनों की मधुर धुन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रख्यात कथावाचक पंडित सतीशकांत शास्त्री के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं&period; कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूब जाते हैं&period; कथा समाप्ति के बाद भी भक्तों के चेहरे पर आध्यात्मिक आनंद और संतोष स्पष्ट दिखाई देता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया&period; कथावाचक ने बताया कि रुक्मिणी जी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने मन&comma; वचन और कर्म से पति रूप में स्वीकार किया था&period; जब उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से कराने का प्रयास किया तो रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी व्यथा सुनाई&period; इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी हरण कर उनका विवाह संपन्न कराया&period; इस प्रसंग के वर्णन के दौरान कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे और &&num;8220&semi;राधे-राधे&&num;8221&semi;&comma; &&num;8220&semi;हरे कृष्ण-हरे राम&&num;8221&semi; तथा &&num;8220&semi;जय श्रीकृष्ण&&num;8221&semi; के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रुक्मिणी विवाह प्रसंग के दौरान भजन-कीर्तन और मंगल गीतों ने भक्ति के माहौल में चार चांद लगा दिए&period; महिलाओं ने श्रद्धा के साथ मंगल गीत गाए जबकि श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए&period; ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कथा स्थल स्वयं द्वारिका नगरी में परिवर्तित हो गया हो।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पंडित सतीशकांत शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत पुराण भगवान श्रीकृष्ण का साहित्यिक स्वरूप है&period; इसके श्रवण मात्र से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है&period; भागवत कथा मनुष्य को धर्म&comma; भक्ति&comma; प्रेम&comma; करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ज्ञात हो कि तीन जून को आशोचक गांव स्थित देवी स्थान से भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई थी&period; बैण्ड-बाजे&comma; हाथी-घोड़े और धार्मिक जयघोषों के साथ निकली यह शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए गोल्डेन रिसोर्ट स्थित कथा स्थल तक पहुंची थी&period; यात्रा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म के प्रति अपनी आस्था प्रकट की थी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आयोजन को सफल बनाने में पूर्वी आशोचक&comma; आशोचक और जकरियापुर के ग्रामीण तथा श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ जुटे हुए हैं&period; आयोजकों ने बताया कि कथा के समापन अवसर पर बुधवार को महाप्रसाद वितरण किया जाएगा&period; इसके लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। पूरे क्षेत्र में इन दिनों भक्ति&comma; श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है&period; कथा स्थल पर पहुंचने वाला प्रत्येक श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सराबोर होकर लौट रहा हैं।<&sol;p>&NewLine;

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