बिहार सरकार अंग्रेजों की गुलामी वाली नीति अपना कर, राज के युवाओं को बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलना चाहती है

<p><strong>अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;strong> सरकार अंग्रेजों की गुलामी वाली नीति अपना कर राज के युवाओं को बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलना चाहती है। सरकार कठोर हो रही है। हमारा अनिश्चितकालीन हड़ताल को आज 10 दिन होना चल रहा है फोन तो सरकार द्वारा अभी तक हमारी मांगों के प्रति किसी भी प्रकार के रुचि नहीं दिखा जाना उनकी निरंकुशता को दिखाता है। उक्त बातें समाहरणालय स्थित कार्यपालक सहायकों के धरना स्थल पर उपस्थित सदस्यों को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष मनीष ठाकुर ने कहे&period;<&sol;p>&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि हमें आजादी गाने को सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है। हम तो हम संविदा की कठोर नीति से आजादी चाहते हैं। जिस प्रकार अंग्रेजी सरकार आजादी के सेनानियों पर तरह-तरह के दमनकारी नीति अपनाकर आंदोलन कुचलने का प्रयास करती थी ठीक उसी प्रकार राज्य की सरकार दमनकारी नीति अपनाकर हमारी जायज मांगों को कुचलने का प्रयास कर रही है&period;<&sol;p>&NewLine;<p>वहीं संघ के उपाध्यक्ष दीपा मजूमदार ने कार्यपालक सहायकों को संबोधित करते हुए कहा कि कमीशन खोरी को बढ़ावा देने वाली बीपीएसएम 29 वीं बैठक में लिए गए निर्णय को सरकार द्वारा वापस लिया जाना चाहिए। बीपीएसएम द्वारा लिया गया होने निर्णय अत्यंत कठोर और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली है&period;<&sol;p>&NewLine;<p>मीडिया प्रभारी आदित्य प्रियदर्शी ने कहा कि लोकतांत्रिक राज्य में सरकार इतनी निरंकुश कैसे हो सकती है&quest; आंदोलन के दसवें दिन भी हमारी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसके विपरीत कार्यपालक सहायकों के विरुद्ध जिला पदाधिकारी के माध्यम से दंडात्मक निर्णय लिया जा रहा है। सरकार की इन जानकारी नीतियों का विरोध करते हैं और मरते दम तक सरकार की दंडात्मक और शोषणकारी नीति के विरुद्ध आंदोलनरत रहेंगे। सरकार को हमारी जायज 8 सूत्री मांग की पूर्ति कर जनहित में निर्णय लेना चाहिए&period;<&sol;p>&NewLine;<p>कार्यकारी अध्यक्ष रोहित गुप्ता ने कहा कि हम अपने अंतिम सांस तक आंदोलन को जारी रखेंगे। हमारा संविधान हमें अपने हक की लड़ाई के लिए अधिकार प्रदान करता है और हम अपने अधिकार के लड़ाई के लिए किसी के पास नहीं झुकेंगे&period;<&sol;p>&NewLine;<p>जितेंद्र वर्मा&comma; सूरज विश्वास&comma; मनीष कश्यप&comma; काजल&comma; सोनिका&comma; वर्षा रानी&comma; खुशबू&comma; प्रिया&comma; निधि&comma; शिल्पा&comma; प्रिया&comma; संजीव सिंह&comma; अभिषेक ब्याहुत&comma; अमित सिंह&comma; सौरभ&comma; संजीव पासवान&comma; प्रभाकर वर्मा&comma; राजीव आदि सहित राज्य के समस्त कार्यापालक पर अपनी मांग पर डटे हुए थे। सभी का एक स्वर में कहना था हमें गुलामी वाली जिंदगी नहीं चाहिए।<&sol;p>&NewLine;

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