एईएस व जेई के खतरों से निपटने के लिये विभाग मुस्तैदप्रमुख संस्थानों में मरीजों के उपचार के लिये बनाये गये विशेष वार्ड

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर &colon;<&sol;strong> गर्मी का मौसम शुरू होते ही जिले में एईएस व जेई के प्रसार का खतरा मंडराने लगा है। हर साल गर्मी के मौसम में इस बीमारी के फैलने की आशंका बनी रहती है। लिहाजा संभावित खतरों के प्रति स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। जिलाधिकारी अनिल कुमार के निर्देश पर रोग नियंत्रण व उपचार संबंधी सभी जरूरी तैयारियां की गयी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जीविका&comma; आईसीडीएस&comma; शिक्षा सहित संबंधित अन्य विभागों के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर रोग से बचाव व उपचार संबंधी इंतजामों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। एईएस व जेई से संबंधित मामलों की निगरानी जिलाधिकारी के स्तर से की जा रही है। हाल में संपन्न जिला टास्क फोर्स की बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को रोग नियंत्रण व बचाव संबंधी इंतजाम को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई जरूरी निर्देश दिये हैं। संबंधित विभाग इसके अनुपालन के प्रयासों में जुटा है।<br>मरीजों के उपचार के लिये बनाये गये विशेष वार्ड<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एईएस व जेई को लेकर विभागीय तैयारियों कीं जानकारी देते हुए वीडीसीओ राम कुमार ने बताया कि इसे लेकर विभिन्न स्तरों पर जरूरी तैयारियां की गयी है। जिले के सभी सभी प्रमुख संस्थानों में एईएस व जेई के मरीजों के लिये विशेष वार्ड बनाये गये हैं। जहां विशेषज्ञ चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गयी है। एईएस व जेई के खतरे से निपटने के लिये सभी एएनएम&comma; आशा सहित स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत ईएमटी&comma; एंबुलेंस ड्राइवर को भी इस संबंध में जरूरी प्रशिक्षण दिया गया है। ताकि रोग का प्रबंधन व उपचार संबंधी इंतजाम को अधिक प्रभावी व उपयोगी बनाया जा सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सभी संस्थानों को उपलब्ध कराया गया एईएस इमरजेंसी ड्रग किट<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर रोग प्रबंधन संबंधी इंतजाम को अधिक कारगर व प्रभावी बनाने की पहल की गयी है। सभी पीएचसी में एईएस व जेई के मरीजों के लिये दो बेड आरक्षित रखे गये हैं। वहीं सदर अस्पताल में 10 बेड व अनुमंडल अस्पताल फारबिसगंज में एईएस व जेई मरीजों के समुचित उपचार के लिये 05 बेड क्षमता वाला विशेष वार्ड संचालित है। उन्होंने बताया कि रोग के कुशल प्रबंधन के उद्देश्य से सभी संस्थानों को एईएस इमरजेंसी ड्रग किट उपलब्ध करायाा गया है। इसमें सभी जरूरी दवाओं को शामिल किया गया है। रोग संबंधी गंभीर मामला सामने आने पर उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर करने के लिये नि&colon;शुल्क एंबुलेंस उपलब्ध कराये जाने की जानकारी उन्होंने दी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>विभिन्न स्तरों पर लोगों को जागरूक करने की हो रही पहल<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने बताया कि जिलाधिकारी से प्राप्त दिशा निर्देश के आलोक में जीविका&comma; आईसीडीएस&comma; पशुपालन&comma; शिक्षा सहित संबंधित अन्य विभागों से परस्पर समन्वय स्थापित करते हुए रोग नियंत्रण संबंधी उपायों को प्रभावी बनाने की पहल की जा रही है। आशा व एएनएम के माध्यम से समुदाय स्तर पर रोग से बचाव व इसे नियंत्रित करने संबंधी उपायों के प्रति जागरूकता फैलाया जा रहा है। इसी तरह अन्य विभागों के सहयोग से विभिन्न स्तरों पर लोगों को जागरूक करने की पहल की गयी है।<&sol;p>&NewLine;

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