सरस्वती की उत्पत्ति से सृष्टि को स्वर मिला – गुरु प्रेम 

<p><strong>फुलवारीशरीफ&lpar;अजित यादव&rpar;&colon;<&sol;strong> मंगलवार को मदर्स इण्टरनेशनल टीचर्स ट्रेनिंग अकादमी &&num;8216&semi; के प्रांगण में विद्या की देवी सरस्वती पूजा धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया&period; अकादमी के अरशद अहमद &comma;प्राचार्या गुलिश्र्ता खातून&comma; सुप्रिया चटजी एवम बड़ी संख्या में छात्र छःत्राओ व शिक्षकगण की उपस्थिति ने माहौल भक्तिमय बना दिया&period; निदेशक ने संस्थान परिवार को वसंत पंचमी की शुभकामनाएँ देते हुए कहा &comma; कि &&num;8221&semi; माँ सरस्वती शिक्षा ज्ञान की देवी है जिनकी आराधना वंदना के बगैर कोई विद्वान नही हो सकता है&period; वहीं एसडभी पब्लिक स्कूल नत्थूपुर कुरथौल रोड<&sol;p>&NewLine;<div class&equals;"mail-message-content collapsible zoom-normal mail-show-images" style&equals;"width&colon;328px&semi;font-family&colon;sans-serif&semi;font-size&colon;12&period;8px&semi;font-style&colon;normal&semi;font-weight&colon;400&semi;letter-spacing&colon;normal&semi;text-transform&colon;none&semi;margin&colon;16px0px&semi;text-align&colon;left">&NewLine;<div class&equals;"clear">&NewLine;<div dir&equals;"auto">&NewLine;<div dir&equals;"auto">&NewLine;<div dir&equals;"auto">परसा बाजार में भी विद्द्या की देवी माँ सरस्वती की पूजन्तोत्सव की धूम रही । सुबह से ही विद्यालय में छात्र छःत्राओ के चहकते चेहरे बसन्त के आगमन को।गाथा बखान कर रहे थे । विद्यालय निदेशक राजेश्वर प्रसाद उप निदेशक अनिल कुमार बलवंत कुमार प्रिंसीपल सुरेंद्र प्रसाद सहित अन्य ने बसन्त पंचमी की शुभकामनाएं दी&period;<&sol;p>&NewLine;<p>वहीं संपतचक के माँ शरदापुरम स्थित प्रेमालोक मिशन स्कूल में शिक्षा की देवी माँ सरस्वती की आराधना में वर दे बीणा वादिनी वर दे कि भक्तिमय संगित गूंजती रही । विद्यालय निदेशक गुरु प्रेम ने कहा कि वसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती की उत्पत्ति हुई थी। पूरी सृष्टि मौन थी तो ब्रह्मा जी ने विष्णु जी की अनुमति लेकर अपने कमंडल के जल से सरस्वती की उत्पत्ति की। इसके बाद सृष्टि को स्वर मिले। इसलिए वसंत पंचमी को मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं और इस अवसर पर मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा-उपासना का विधान है। आज महिलाएं पीले वस्त्र घारण करती हैं।<&sol;p><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"> <&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"> <&sol;div>&NewLine;<&sol;div>&NewLine;<&sol;div>&NewLine;<&sol;div>&NewLine;<&sol;div>&NewLine;

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