थाइलैंड के बौद्ध गुरु उपसंघराजा का महावीर कैंसर संस्थान आगमन, मरीजों को दी सहायता व आशीर्वचन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मानवीय और आध्यात्मिक जुड़ाव देखने को मिला&comma; जब थाइलैंड&comma; बैंकॉक के बौद्ध धर्मगुरु उपसंघराजा सोमदेत फ्रा धिरायणमुनी अपने 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ संस्थान पहुंचे&period; इस दौरान उन्होंने कैंसर पीड़ित मरीजों से मुलाकात कर उन्हें आशीर्वचन दिया और हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संस्थान पहुंचने पर उपसंघराजा एवं उनके दल का स्वागत चिकित्सा अधीक्षक डॉ&period; एल&period; बी&period; सिंह ने किया&period; इस अवसर पर डॉ&period; बी&period; सन्याल&comma; डॉ&period; मनीषा सिंह&comma; डॉ&period; विनीता त्रिवेदी तथा श्रीमती रोशन आरा भी मौजूद रहीं&period; स्वागत के बाद अतिथियों ने विभिन्न वार्डों का भ्रमण किया और भर्ती मरीजों का हालचाल जाना। उपसंघराजा सोमदेत फ्रा धिरायणमुनी ने मरीजों के बीच जाकर उन्हें मानसिक संबल प्रदान किया और सकारात्मक सोच बनाए रखने की सलाह दी&period; उन्होंने कहा कि सेवा और करुणा ही मानवता का सबसे बड़ा धर्म है&comma; और इसी भावना से वे भारत आकर जरूरतमंदों की सहायता कर रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस मौके पर उन्होंने महावीर कैंसर संस्थान को 23 आधुनिक बेड और 50 व्हीलचेयर दान स्वरूप प्रदान किए&comma; जिससे मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी&period; इसके अलावा कई मरीजों को आर्थिक सहायता भी दी गई&comma; जिससे उनके इलाज में सहयोग मिल सके&period; चिकित्सा अधीक्षक डॉ&period; एल&period; बी&period; सिंह ने बताया कि इस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय सहयोग न केवल मरीजों के लिए राहत लेकर आता है&comma; बल्कि संस्थान के लिए भी प्रेरणादायक है&period; उन्होंने थाई प्रतिनिधिमंडल के इस योगदान के लिए आभार जताया&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सेवा भावना की सराहना की और कहा कि यहां मरीजों की देखभाल अत्यंत संवेदनशीलता और समर्पण के साथ की जा रही है। इस अवसर पर पूरे संस्थान में एक भावुक और प्रेरणादायक माहौल देखने को मिला&period; मरीजों और उनके परिजनों ने भी इस सहयोग और आशीर्वचन के लिए धन्यवाद व्यक्त किया&period; यह आयोजन मानवता&comma; सेवा और अंतरराष्ट्रीय सद्भाव का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।<&sol;p>&NewLine;

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