मन-प्राण को स्पंदित करती है सुजित मुखर्जी की कवितायें

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पटना&comma; अजीत।<&sol;mark><&sol;strong> अपनी काव्य-प्रतिभा से संसार के साहित्यकारों को अचंभित कर देने वाले कवि सुजित मुखर्जी की कविताएँ न केवल समाज को झकझोरती है&comma; अपितु पाठकों के मन-प्राण को भी स्पंदित करती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रसायन-शास्त्र के छात्र रहे और अंग्रेज़ी में सृजन करने वाले श्री मुखर्जी में काव्य के सभी रसयान अपने संपूर्ण सौंदर्य के साथ लक्षित होते हैं। &&num;8216&semi;पोयट्स ऑफ द वर्ल्ड ऑर्गनाइज़ेशन&&num;8217&semi; के अध्यक्ष के रूप में पूरी दुनिया में भारतीय विचार को स्थापित करने में भी श्री मुखर्जी की भूमिका प्रशंसा योग्य है।<br &sol;>बुधवार को&comma; बिहार हिन्दी साहित्त्य सम्मेलन में&comma; अंग्रेज़ी में लिखी गयी श्री मुखर्जी की कविताओं के &&num;8216&semi;स्पंदन&&num;8217&semi; नाम से हुए हिन्दी अनुवाद का लोकार्पण करते हुए&comma; सम्मेलन-अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने यह बातें कही। उन्होंने कहा कि यह साहित्य-संसार के लिए अत्यंत सुखद है कि श्री मुखर्जी&comma; भाषा और साहित्य का विद्यार्थी न होते हुए भी साहित्य का बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। इनकी काव्य-प्रतिभा हिन्दी के शब्द ग्रहण करे तो इससे भारत की राष्ट्रभाषा को बहुत बल मिलेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह के मुख्य अतिथि और सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रो मंगल मूर्ति ने कहा कि &&num;8216&semi;कविता&&num;8217&semi;&comma; साहित्य की धुरी है। इससे ही साहित्य का उन्नयन हुआ है। लोकार्पित पुस्तक के कवि संपूर्ण विश्व में अपनी रचनाओं और कार्यों से समादृत हो रहे हैं। इनकी काव्य-रचनाओं को बहुत ही सुंदर और सार्थक अनुवाद&comma; कवि योगेन्द्र कृष्ण ने किया है&comma; जो पुस्तक रूप में पाठक-वृंद को प्रस्तुत है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पुस्तक के अनुवादकर्त्ता और योगेन्द्र कृष्ण ने कहा कि पुस्तक की सभी कविताएँ अत्यंत सहज और सरल हैं। इसीलिए बहुत ग्राह्य भी हैं। किंतु इनका अनुवाद कठिन था। अनुवाद करते समय मुझे कवि के साथ &&num;8216&semi;कवि&&num;8217&semi; बनने की अनिवार्यता लक्षित हुई&comma; जिसे मैंने यथा साध्य पूरा करने की चेष्टा की है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कृतज्ञता ज्ञापन करते हुए श्री मुखर्जी ने कहा कि बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन हम सभी साहित्याकारों के लिए &&num;8216&semi;तीर्थ-स्थल&&num;8217&semi; की तरह है। साहित्य के इस तीर्थ में अपनी पुस्तक का लोकार्पण होते देख कर आनन्द-मुदित अनुभव कर रहा हूँ। मेरी मातृ-भाषा &&num;8216&semi;बंगला&&num;8217&semi; है। पूरी दुनिया मुझे अंग्रेज़ी का कवि मानती है। किंतु मैं हिन्दी से प्रेम करता हूँ। यह बहुत ही समृद्ध भाषा है। इसमें दुनिया की बड़ी पुस्तकों का अनुवाद होना चाहिए तथा हिन्दी के बड़े ग्रंथों का अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद होना चाहिए।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>श्री मुखर्जी ने कहा कि ७५ देशों में उन्हें काव्य-पाठ का अवसर मिल चुका है। ४५ पुस्तकें प्रकाश में आ चुकी है। २० विदेशी भाषाओं में उनकी कविताओं के अनुवाद हुए हैं। उन्होंने लोकार्पित पुस्तक से &&num;8216&semi;मेरे प्यारे मुंगेर&&num;8217&semi;&comma; &&num;8216&semi;हसीन यादें&&num;8217&semi;&comma; &&num;8216&semi;आसमान&&num;8217&semi;&comma; &&num;8216&semi;कैनवास&&num;8217&semi;&comma; &&num;8216&semi;तुम कहती हो&&num;8217&semi;&comma; &&num;8216&semi;नज़र अंदाज़&&num;8217&semi;&comma; &&num;8216&semi;पुरानी दिल्ली&&num;8217&semi;&comma; &&num;8216&semi;सवाल&&num;8217&semi;&comma; &&num;8216&semi;मुहब्बत&&num;8217&semi; आदि कविताओं का पाठ कर श्रोताओं की करतल-ध्वनि प्राप्त की।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष जियालाल आर्य&comma; डा शंकर प्रसाद&comma; डा मधु वर्मा&comma; प्रो उमा सिन्हा तथा अवध बिहारी सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन का आरंभ चंदा मिश्र ने वाणी-वंदना से किया। मशहूर शायरा तलत परवीन&comma; कुमार अनुपम&comma; अरविन्द अकेला&comma; अर्जुन प्रसाद सिंह&comma; विशाल कुमार आदि ने अपनी काव्य-रचनाओं से लोकार्पण समारोह को सारस्वत रूप प्रदान किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन प्रो सुशील कुमार झा ने किया। ई सुनील सिंह&comma; नन्दन कुमार मीत&comma; कुमारी मेनका&comma; अमरेन्द्र कुमार&comma; डौली कुमारी&comma; राहूल कुमार&comma; अल्पना कुमारी&comma; राज कमल&comma; अनिल कुमार सिन्हा&comma; दिनेश कुमार आदि उत्सव में उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;

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