मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए आईआईटी पटना में विशेषज्ञों का हुआ राज्य स्तरीय संवाद

&NewLine;<p><strong>पटना&comma; न्यूज़ क्राइम 24।<&sol;strong> बिहार में मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। &&num;8216&semi;एडवांसिंग मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ इन बिहार&&num;8217&semi; विषय पर आधारित इस कार्यक्रम का आयोजन आईआईटी पटना और वीमेंस कलेक्टिव फोरम&comma; नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में संस्थान के सीनेट हॉल में संपन्न हुआ। पटना आईआईटी में ह्यूमैनिटी साइंस की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ पापिया राज ने कहा कि इस कार्यशाला का एक मुख्य उद्देश्य यहां उपस्थित 100 से अधिक फ्रंट लाइन वर्करों&comma;आशा व आंगनबाड़ी दीदियों को सामाजिक परिप्रेक्ष्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की महत्ता बतलाना था&comma;ताकि वे एक अग्रिम दूत बनकर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी ला सकें।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>तकनीक और संवेदनशीलता का हुआ मेल&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि  à¤®à¤¹à¤¾à¤µà¥€à¤° कैंसर संस्थान की एमडी&comma;डॉ&period; मनीषा सिंह&comma; पटना आईआईटी में ह्यूमैनिटी साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आदित्य राज&comma;डॉ पापिया राज व यूनिसेफ बिहार के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ&period; एस&period;एस&period; रेड्डी ने दीप प्रज्वलित कर किया। वर्चुअल माध्यम से जुड़े आईआईटी पटना के निदेशक प्रो&period; टी&period;एन&period; सिंह ने कहा कि तकनीक और चिकित्सा के समन्वय से ही बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाई जा सकती है। मुख्य अतिथि डॉ&period; मनीषा सिंह ने अपने की नोट संबोधन में राज्य में कैंसर&comma; मातृत्व स्वास्थ्य और गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता पर बल दिया&comma; वहीं डॉ&period; एस&period;एस&period; रेड्डी ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को और अधिक संवेदनशील बनाने की आवश्यकता बताई।<br> <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>मातृ देखभाल से लेकर शिशु पोषण तक की चुनौतियों पर मंथन&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में चिकित्सा विशेषज्ञों ने बिहार के स्वास्थ्य परिदृश्य का गहन विश्लेषण किया। प्रथम सत्र में डॉ&period; आदित्य राज की अध्यक्षता में &&num;8216&semi;मातृ स्वास्थ्य&&num;8217&semi; पर केंद्रित चर्चा हुई&comma; जिसमें मातृ सेवा सदन की डॉ&period; दीपांविता भट्टाचार्जी&comma; ईएसआईसी बिहटा की डॉ&period; आकांक्षा सुमन और आईआईटी की डॉ&period; प्रीति सिंह ने सुरक्षित प्रसव और प्रसव पूर्व देखभाल की बारीकियों को साझा किया। वहीं&comma; डॉ&period; राजीव कमल ने स्वास्थ्य सेवाओं की सामाजिक पहुंच पर अपनी बात रखी।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अगले चरण में डॉ&period; प्रशांत कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में &&num;8216&semi;शिशु स्वास्थ्य&&num;8217&semi; पर विमर्श हुआ&comma; जहाँ एनएमसीएच के डॉ&period; शंभू कुमार ने बच्चों में कुपोषण और टीकाकरण की अनिवार्यता पर जोर दिया। इसी क्रम में आईसीडीएस निदेशालय की जया मिश्रा ने सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के राज्य समन्वयक श्री अमन ने स्वास्थ्य सेवाओं में सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। डॉ&period; उदित सतीजा ने चिकित्सा क्षेत्र में इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>प्रतिभागियों को मिला प्रमाण पत्र&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>समारोह के समापन सत्र में कुल 227 प्रतिभागियों और शोधार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ&period; ए&period; अली &lpar;पीआईसी मेडिकल&rpar; और विजय कुमार &lpar;डिप्टी रजिस्ट्रार&rpar; की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में&comma; कार्यक्रम की मुख्य आयोजक और प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ&period; पापिया राज ने सभी विशेषज्ञों और आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि कार्यशाला के निष्कर्षों को नीतिगत सुधारों के लिए सरकार को भेजा जाएगा। इस अवसर पर संस्थान के कई वरिष्ठ प्राध्यापक उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;

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