पर्यावरण, स्वच्छता व गौरैया संरक्षण पर स्लोगन लेखन, चित्रकला प्रतियोगिता हुई, निकली गंगा स्वच्छता रैली

<p><strong>बलिया&lpar;संजय कुमार तिवारी&rpar;&colon;<&sol;strong> विश्व गौरैया दिवस पर जिला बस्ती स्थित वन विहार में कार्यक्रम आयोजित हुआ&comma; जिसमें विद्यालयों के छात्र-छात्राओं एवं स्टाफ ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में डीएफओ श्रद्धा यादव ने गौरैया संरक्षण के बारे में बताया। कहा&comma; &&num;8216&semi;एक समय था जब नन्ही सी फुदुकती&comma; चहचहाती गौरैया हमारे व आपके आंगन की शोभा होती थी। गौरैया पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाती है। यह छोटे-छोटे उन कीड़ों को नष्ट कर देती है&comma; जो हमारे पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। मानव की बदलती जीवन शैली में इस घरेलू चिड़िया को दुर्लभ बना दिया है। गौरैया के विलुप्त होने के कई कारण है। पहले गांव में अधिसंख्या घर घास-फूस व झोपड़ी के होते थे&comma; जिसमें गौरैया अपना घोसला बना लेती थी&comma; अब पक्के मकान बन गये है। इसके अलावा झाड़-झखाड़ भी खत्म हो चुके है&comma; उनके प्राकृतिक वासस्थल गायब होने से यह धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। मोबाइल टावर का रेडियेसन भी इनके प्रजनन क्षमता पर प्रभाव डालता है&comma; जिसके कारण इनकी संख्या कम हो रही है। दूषित आहार भी गौरैयों का विलुप्त होने का एक कारण है&period;<&sol;p>&NewLine;<p>विभिन्न स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं ने भी गौरैया की महत्ता से अवगत कराते हुए संरक्षण करने को जागरूक किया। ज्ञानपीठिका स्कूल के साथ प्राथमिक विद्यालय पटखौली&comma; देवकली&comma; उच्च प्राथमिक विद्यालय देवकली व भरतपुरा&comma; प्राथमिक विद्यालय जीराबस्ती नं-1&comma; फूलवसिया देवी रामजन्म शिक्षण संस्थान&comma; राजकीय इण्टर कालेज&comma; बलिया के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण&comma; स्वच्छता एवं गौरैया संरक्षण पर चित्रकला प्रतियोगिता&comma; स्लोगन लेखन एवं गंगा स्वच्छता रैली निकाली।<&sol;p>&NewLine;

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