काउंसिल में हो रही अनियमिता के खिलाफ शहनाज फातमा ने पटना उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर किया

&NewLine;<p>&lbrack;Edited By&colon; Robin Raj&rsqb;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;strong> बिहार राज्य बार काउंसिल की सदस्य शहनाज फातमा ने माननीय उच्च न्यायालय पटना में बिहार राज्य बार काउंसिल के खिलाफ एक याचिका दायर किया है&comma; शहनाज़ का आरोप है कि बार काउंसिल में हो रही अनियमिता&comma; अधिवक्तओ के फण्ड का दुरूपयोग होने पर आवाज उठाने एवं वकीलों के हित में मांग करने के कारण बार काउंसिल नें इन्हें आम सभा कि बैठक में शामिल होने तथा सभी  कमिटीयों कि बैठक से वंचित किया गया है जो असंवैधानिक एवं क़ानून का उलंघन है&comma; क्योंकि बार काउंसिल को यह अधिकार नहीं कि वह किसी इलेक्टेड मेंबर्स को कानून का उल्लंघन कर सारे समितियों से हटा सके क्योंकि सभी सदस्यों का पद एवं गरिमा सामान है&period; वहीं फातमा ने बताया कि 2 साल से लगातार वे अधिवक्ताओं के हित में आवाज उठा रही हैं तथा उनकी आवाज को दबाने के लिए काउंसिल के सदस्यों द्वारा साजिश रच कर उन्हें समितियों से हटाया गया है ताकि काउंसिल में हो रही किसी भी मनमानी की जानकारी उनको ना हो सके और अधिवक्ताओं के हित में आवाज नहीं उठा सके&period; इस प्रकार उन्हें  मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था ताकि वह थक्कर स्वयं इस्तीफ़ा दे दें&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फातमा का आरोप है कि वर्ष 2006 से अब तक ऑडिट नहीं कराया गया एवं बार काउंसिल में हो रहे फंड के कई दुरुपयोग का इन्होंने कई पर्दाफाश किया है&period; बाथरूम की मरम्मत के नाम पर 17 लाख रुपए का बिल बनाया जाता है&comma; इलेक्शन के नाम पर सवा करोड़ का बिल पास होता है&comma; वेलफेयर टिकट का अरबों-खरबों रुपए मेडिक्लेम डेथ-क्लेम तक भुगतान में विलंब किया जाता है और टीएडीए के नाम पर मेंबर नाजायज रुपए की उगाही करते हैं&period; इस अनियमितता के  कारण फातमा ने जब आवाज उठाया है तो मनन कुमार मिश्रा सहित अध्यक्ष एवं बार काउंसिल के सभी सदस्य साजिश के तहत उनको हटाना चाहा अधिवक्ताओं के हित में आवाज उठाने एवं कुर्तियों का पर्दाफाश करने के कारण उनके साथ ऐसा बर्ताव कर उन्हें  डराया जा रहा है ताकि वह वकीलों के हित में आवाज नहीं उठा सके इसलिए शहनाज ने न्यायालय पर विश्वास रखकर माननीय  पटना उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है&period; वर्ष 2006 से अब तक की फॉरेंसिक ऑडिट कराने कि मांग की है&comma; उन्होंने बार काउंसिल के अध्यक्ष सचिव सदस्य सहित अध्यक्ष बार काउंसिल ऑफ इंडिया एवं नोटिस रिसीव करवा दी है&period; तथा एक याचिका दायर की है।<&sol;p>&NewLine;

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