शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की 94वीं शहादत वर्षगांठ पर ‘शहादत दिवस’ आयोजित

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना सिटी&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> सांप्रदायिक सद्भाव समन्वय समिति द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह&comma; शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव की 94वीं शहादत वर्षगांठ पर &&num;8216&semi;शहादत दिवस&&num;8217&semi; का आयोजन स्थानीय भगत सिंह चौक पर किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आयोजन की शुरुआत शहीद त्रय की तस्वीर पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण से हुई। कार्यक्रम में नगर के विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा &&num;8216&semi;भगत सिंह&comma; राजगुरु और सुखदेव अमर रहें&&num;8217&semi; एवं &&num;8216&semi;इंकलाब जिंदाबाद&&num;8217&semi; के नारे लगाए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वरीय शिक्षाविद् एक़बाल अहमद ने अपने संबोधन में कहा कि भगत सिंह दूरदर्शी क्रांतिकारी थे&comma; जिन्होंने यह निष्कर्ष निकाला था कि सामाजिक और आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता केवल चंद लोगों को बहुमत का शोषण करने की आज़ादी देगी। उन्होंने भगत सिंह को शोषण और साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ने वाले महान विचारक और स्वतंत्रता संग्राम के नायक के रूप में वर्णित किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सभा को संबोधित करते हुए डॉ&period; सी&period;पी&period; सिन्हा और हर्षा मिश्रा ने शहीद-ए-आजम के विचारों की प्रासंगिकता पर बल दिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सांप्रदायिक सद्भाव समन्वय समिति के कार्यकारी अध्यक्ष समी अहमद ने कहा कि भारत 1947 में तो आज़ाद हो गया&comma; लेकिन क्रांतिकारियों के सपने अब तक अधूरे हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज भी बड़ी आबादी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है और समाज को व्यवस्था परिवर्तन की आवश्यकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में कॉ&period; मिथिलेश सिंह&comma; प्रफुल्ल पांडेय&comma; संजीव कुमार यादव&comma; रघुनाथ प्रसाद&comma; कॉ&period; जितेंद्र कुमार&comma; कॉ&period; रामनारायण सिंह&comma; योगेंद्र कुमार ओम&comma; अरविंद प्रसाद&comma; शिव कुमार चंद्रवंशी&comma; गौतम कुमार&comma; आलोक चोपड़ा&comma; संजय रॉय&comma; राजेश शुक्ला टिल्लू&comma; कॉ&period; ललन यादव&comma; कुमार लखन&comma; आशीष मिश्र&comma; तन्मय यादव&comma; सेनेटरी इंस्पेक्टर धीरज कुमार&comma; राजीव कुमार सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी एवं शिक्षाविद् विजय कुमार सिंह ने किया। समापन के अवसर पर यह संकल्प लिया गया कि स्मारक स्थल पर स्थित शहीद-ए-आजम की वर्तमान जीर्ण प्रतिमा के स्थान पर एक भव्य मूर्ति की स्थापना शीघ्र की जाएगी।<&sol;p>&NewLine;

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