रामधारी सिंह दिनकर जयंती समारोह सम्पन्न

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पटना सिटी&comma; न्यूज क्राइम 24।<&sol;mark><&sol;strong> श्री गुरु गोविंद सिंह महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो०&lpar;डॉ०&rpar; कनक भूषण मिश्र की अध्यक्षता में राष्ट्रकवि &&num;8220&semi;रामधारी सिंह दिनकर&&num;8221&semi; की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। सर्वप्रथम महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य के द्वारा दिनकर जी कि तैलचित्र पर माल्यार्पण तथा पुष्पांजलि की गई। तत्पश्चात द्वीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम शुभारंभ किया गया। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रभारी प्राचार्य ने कहा कि दिनकर जी राष्ट्र कवि थे। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वह बिहार के निवासी थे लेकिन उनकी रचनाएं काफी प्रभावशाली थी। उन्होंने रश्मिरथी जैसे पुस्तकों को लिखा तथा दिनकर जी राज्यसभा के भी सदस्य बने उनकी रचनाएं उन्नत तथा कालजई थी। हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ करुणा राय ने हिंदी के रामधारी सिंह दिनकर की जीवन यात्रा एवं उनकी रचनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हिंदी साहित्य में रामधारी सिंह दिनकर साहित्य के वह सशक्त हस्ताक्षर हैं&comma; जिनकी चमक सूर्य के समान है। उनकी कविताएं उनके समय की चमक ही नहीं हैं&comma; बल्कि उसकी रौशनी से आने वाली पीढ़ियां भी प्रकाशमान होती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>हिंदी के सहायक प्राध्यापक डॉ सुशील कुमार ने राष्ट्रकवि रामधारी के बारे में बताया कि दिनकर जी एक लेखक&comma; कवि और निबंधकार थे। उनकी रचनाओं के लिए उन्हें पद्म विभूषण की उपाधि से भी नवाजा गया था।&period; उनकी पुस्तक संस्कृति के चार अध्याय के लिये साहित्य अकादमी पुरस्कार और उर्वशी के लिये भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया। उनकी कविता में वीर रस झलकता है और भारतीय स्वतंत्रता से पहले के दिनों में उनकी प्रेरणादायक देशभक्ति रचनाओं के कारण उन्हें राष्ट्रकवि &lpar;&&num;8220&semi;राष्ट्रीय कवि&&num;8221&semi;&rpar; कहा जाता। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वहीं हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ सुनील कुमार ने बताया कि दिनकर जी को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित रचना उर्वशी की कहानी मानवीय प्रेम&comma; वासना और सम्बन्धों के इर्द-गिर्द घूमती है। वहीं &&num;8216&semi;कुरुक्षेत्र&&num;8217&semi;&comma; &&num;8216&semi;महाभारत&&num;8217&semi; के शान्ति-पर्व की कविता रूप है । इस अवसर पर डॉ अरुण कुमार&lpar;परीक्षा नियंत्रक&rpar;&comma; डॉ उमेश कुमार&comma; डॉ अरविंद कुमार सिंह&comma; डॉ अनिल कुमार सिंह&comma; डॉ मोअब्बास&comma; डॉ पुष्पा सिंह&comma; डॉ रेशमा सिन्हा&comma; डॉ एस&period;टी&period;असलम&comma; डॉ नंद कुमार यादव तथा अधिक संख्या में छात्र&sol;छात्राएं उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;

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