रक्षाबंधन खून के रिश्ते को ही नहीं समझाता बल्कि ये एक पवित्र रिश्ते को जताता हैं : एडवोकेट राहुल रंजन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रक्षा बंधन का पर्व दो शब्दों के मिलने से बना हुआ है&comma; रक्षा और बंधन संस्कृत भाषा के अनुसार&comma; इस पर्व का मतलब होता है की &OpenCurlyDoubleQuote;एक ऐसा बंधन जो की रक्षा प्रदान करता हो”&period; यहाँ पर &OpenCurlyDoubleQuote;रक्षा” का मतलब रक्षा प्रदान करना होता है उअर &OpenCurlyDoubleQuote;बंधन” का मतलब होता है एक गांठ&comma; एक डोर जो की रक्षा प्रदान करे&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ये दोनों ही शब्द मिलकर एक भाई-बहन का प्रतिक होते हैं&period; यहाँ ये प्रतिक केवल खून के रिश्ते को ही नहीं समझाता बल्कि ये एक पवित्र रिश्ते को जताता है&period; यह त्यौहार खुशी प्रदान करने वाला होता है वहीँ ये भाइयों को ये याद दिलाता है की उन्हें अपने बहनों की हमेशा रक्षा करनी है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>इतिहास राजा बलि और माँ लक्ष्मी&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विष्णुपुराण के आधार पर यह माना जाता है कि जब भगवान &num;विष्णु ने राजा &num;बलि को हरा कर तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया&comma; तो बलि ने भगवान विष्णु से उनके महल में रहने का आग्राह किया&period; भगवान विष्णु इस आग्रह को मान गये&period; हालाँकि भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी को भगवान विष्णु और बलि की मित्रता अच्छी नहीं लग रही थी&comma; अतः उन्होंने भगवान विष्णु के साथ वैकुण्ठ जाने का निश्चय किया&period; इसके बाद माँ लक्ष्मी ने बलि को रक्षा धागा बाँध कर भाई बना लिया&period; इस पर बलि ने लक्ष्मी से मनचाहा उपहार मांगने के लिए कहा&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>तब मां ने लक्ष्मी गरीब स्त्री के वेश में पाताल लोक जाकर बलि को राखी बांधा और भगवान विष्णु को वहां से वापस ले जाने का वचन मांगा। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी। तभी से रक्षाबंधन मनया जाता है। इस पर माँ लक्ष्मी ने राजा बलि से कहा कि वह भगवान विष्णु को इस वचन से मुक्त करे कि भगवान विष्णु उसके महल मे रहेंगे&period; बलि ने ये बात मान ली और साथ ही माँ लक्ष्मी को अपनी बहन के रूप में भी स्वीकारा&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>रक्षासूत्र बांधते समय रक्षाबंधन का पवित्र श्लोक का उच्चारण किया गया &colon;-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>यह श्लोक रक्षाबंधन का अभीष्ट मंत्र है &colon;-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>&&num;8216&semi;येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल।<br &sol;>तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल&&num;8217&semi;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अर्थात जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था&comma; उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हें बांधती हूं&comma; यह तुम्हारी रक्षा करेगा और संकट में तुम मेरी रक्षा करना।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>भारत में प्रतिवर्ष &num;श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर को &num;संस्कृत&lowbar;दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>श्रावणीपूर्णिमा अर्थात् रक्षाबन्धन ऋषियों के स्मरण तथा पूजा और समर्पण का पर्व माना जाता है। वैदिक साहित्य में इसे श्रावणी कहा जाता था। इसी दिन गुरुकुलों में वेदाध्ययन कराने से पहले यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है। इस संस्कार को &num;उपनयन अथवा उपाकर्म संस्कार कहते हैं। इस दिन पुराना यज्ञोपवीत भी बदला जाता है। ब्राह्मण यजमानों पर रक्षासूत्र भी बांधते हैं। ऋषि ही संस्कृत साहित्य के आदि स्रोत हैं&comma; इसलिए श्रावणी पूर्णिमा को ऋषि पर्व और संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है।<&sol;p>&NewLine;

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