नजर आया रबी उल अव्वल का चांद, 28 सितम्बर को ईद मिलादुन्नबी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">फुलवारी शरीफ&comma; अजीत।<&sol;mark><&sol;strong> शनिवार को देश के कई हिस्सों में पवित्र रवी उल अव्वल का चांद नजर आने की खबर के बाद फुलवारी शरीफ के खानकाह ए मुजिबिया ने एलान किया है कि 28 सितम्बर को ईद मिलादुन्नबी मनाई जाएगी&period; वहीं 17 सितम्बर को रवी उल अव्वल की पहली तारीख होगी&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बिहार झारखंड उड़ीसा के मुसलमानो को सबसे बड़ी एदारा इमारत शरिया के काजी ए शरीयत मौलाना अंजार आलम काश्मी एवं प्रसिद्ध खानकाह ए मुजिबिया के प्रबंधक हजरत मौलाना मिन्हाजुद्दीन मुजीबी कादरी ने पवित्र रवी उल अव्वल का चांद नजर आने की तस्दीक की है&period; बताया गया कि देश में महाराष्ट्र के मुम्बई&comma; कर्नाटक के बैंगलोर&comma; तेलंगाना&comma; नागालैंड समेत बिहार में पटना पूर्वी चंपारण के बसवारिया बायसी पूर्णिया में भी रवी उल अव्वल का चांद देखा गया&period; वहीं पटना में फुलवारी शरीफ और आसपास के इलाकों में बादल छाए रहने से चांद नजर नहीं आया &period;हालांकि इमारत शरिया के सभी शाखाओ में रबी उल अव्वल के चांद देखे जाने का इंतजाम किया गया था&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मौलाना मिन्हाजुद्दीन कादरी ने बताया कि इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का यौमे पैदाईश यानी जन्मदिन दुनियाभर में धूमधाम के साथ मनाया जाता है&period; इस दिन को ईद मिलाद उन-नबी के नाम से भी जानते हैं&period; इस मुबारक मौके पर खानकाहों में सालाना उर्स लगता है और लोगों को मुये मुबारक की जियारत भी कराई जाती है&period; उन्होंने बताया कि फुलवारी शरीफ खानकाह मुजीबिया में सालाना उर्स की तैयारी शुरू कर दी गई है&period; उर्स में हर साल यहां देश और दुनिया भर के कई मुल्कों से बड़ी तादाद में अकीदतमंद मुंए मुबारक की जियारत करने पहुंचते हैं&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार&comma; इस्लाम के तीसरे महीने यानी रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख 571ई में पैंगबर साहब का जन्म हुआ था कहते हैं कि रबी-उल-अव्वल के 12वें दिन ही मोहम्मद साहब का इंतकाल भी हुआ था &period;<&sol;p>&NewLine;

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