टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनभागीदारी और मीडिया की सक्रिय भूमिका जरूरी : डॉ. अनुपमा सिंह

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को साकार करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग एवं राज्य स्वास्थ्य समिति&comma; बिहार द्वारा ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज &lpar;GHS&rpar; के सहयोग से आजपटना में राज्य स्तरीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत बिहार में किए जा रहे प्रयासों&comma; उपलब्धियों&comma; नवीन गतिविधियों एवं भविष्य की रणनीति से मीडिया को अवगत कराना तथा टीबी उन्मूलन के लिए जन-जागरूकता को और मजबूत करना था।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राज्य स्वास्थ्य समिति&comma; बिहार की अपर कार्यपालक निदेशक डॉ&period; अनुपमा सिंह ने कहा कि माननीय राज्यपाल के सहयोग एवं मार्गदर्शन का उपयोग करते हुए टीबी मुक्त पंचायत एवं टीबी मुक्त वार्ड के लिए राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रतिबद्धता को मजबूत किया जा रहा है। माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा भी इसकी समीक्षा की जाती है। इसके साथ ही हर सप्ताह बिहार के मुख्य सचिव के द्वारा भी इसकी समीक्षा कर दिशा निर्देश दिया जाता है। मुख्य सचिव एवं स्वास्थ्य सचिव के मार्गदर्शन में 2 जुलाई 2026 से चलाए गए विशेष अभियान में निर्धारित 1 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग के लक्ष्य के मुकाबले 2&period;36 करोड़ से अधिक लोगों की टीबी स्क्रीनिंग की गई। स्क्रीनिंग एवं जांच के दौरान 87&comma;623 से अधिक टीबी मरीजों की पहचान की गई&comma; जिनमें 21&comma;550 ऐसे मरीज भी शामिल हैं&comma; जिनमें टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि राज्य में टीबी की जांच एवं पहचान के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके तहत राज्य में 491 डिजिटल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं। 140 एआई टूल आधारित अल्ट्रापोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें टीबी की शीघ्र पहचान में सहयोग कर रही हैं। 768 बाइनोक्युलर माइक्रोस्कोप तथा 89 CBNAAT और 562 Truenat मशीनें जांच की सुविधा को मजबूत कर रही हैं। राज्य में 4 लाइन प्रोब एसे एवं कल्चर DST लैब की सुविधा उपलब्ध है। 11&comma;055 उच्च जोखिम वाले गांवों की पहचान कर वहां टीबी की शीघ्र पहचान को प्राथमिकता दी जा रही है। 24 मार्च 2026 से 5&period;4 लाख से अधिक शिविरों का आयोजन किया गया। 298 लाख लोगों का निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण किया गया&comma; जिसमें लगभग 169 लाख प्रमुख जनसंख्या शामिल है। 17&period;48 लाख से अधिक छाती के एक्स-रे किए गए। 3&period;52 लाख से अधिक बलगम नमूनों की NAAT जांच की गई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान राज्य में 87&comma;623 टीबी मामलों की पहचान की गई&comma; जिसमें 21&comma;550 लक्षण-विहीन टीबी मामले भी शामिल हैं। वहीं&comma; 74&comma;871 टीबी रोगियों &lpar;85 प्रतिशत&rpar; का डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के लिए मूल्यांकन किया गया है। बिहार में वर्ष 2024 के लिए 88 प्रतिशत उपचार सफलता दर दर्ज की गई है। साथ ही&comma; टीबी से होने वाली अनुमानित मृत्यु दर में भी कमी आई है। राज्य में अनुमानित टीबी मृत्यु दर 2023 में 21 प्रति लाख थी जो घटकर 2024 में 20 प्रति लाख हो गई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत बिहार की 547 पंचायतों ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय&comma; भारत सरकार द्वारा निर्धारित सभी 6 मानदंडों को पूरा करते हुए टीबी मुक्त पंचायत का दर्जा हासिल किया है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि टीबी के नए मामलों को रोकने के लिए राज्य के सभी 38 जिलों में टीबी निवारक उपचार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत 2&period;80 लाख घरों की टीबी निवारक उपचार &lpar;TPT&rpar; के लिए जांच की गई है तथा 97&comma;623 पात्र लाभार्थियों ने टीबी निवारक उपचार शुरू किया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि कई प्रकार के नवाचार भी अपनाए जा रहे हैं। इसके तहत पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिला स्तरीय टीबी मुक्त भारत समिति बनाई गई है। जिसमें जिला मजिस्ट्रेट&comma; सिविल सर्जन&comma; जिला टीबी पदाधिकारी&sol;सीडीओ &lpar;टीबी&rpar;&comma; माय भारत समन्वयक&comma; एनसीसी प्रतिनिधि&comma; मेडिकल कॉलेज प्रतिनिधि&comma; जिला पंचायती राज पदाधिकारी&comma; जिला श्रम पदाधिकारी&comma; जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य प्रासंगिक हितधारकों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त&comma; टीबी मुक्त भारत अभियान में माय भारत स्वयंसेवकों&comma; एनसीसी&comma; पंचायत प्रतिनिधियों एवं अन्य सामुदायिक संगठनों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>टीबी उन्मूलन को जन-आंदोलन का स्वरूप दें। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग समग्र सरकार &lpar;Whole of Government&rpar; के दृष्टिकोण के साथ विभिन्न विभागों&comma; जनप्रतिनिधियों&comma; स्वास्थ्यकर्मियों&comma; सहयोगी संस्थाओं&comma; मीडिया एवं सामुदायिक संगठनों के साथ मिलकर जन-जागरूकता को मजबूत करने का कार्य कर रहा है। इस सामूहिक प्रयास का उद्देश्य लोगों को समय पर टीबी की जांच कराने&comma; उपचार को पूरा करने और टीबी से जुड़े सामाजिक भेदभाव एवं भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूक करना है। टीबी की पहचान और उपचार जितनी जल्दी होगा&comma; उतनी ही प्रभावी तरीके से इसके प्रसार को रोका जा सकेगा। आइए&comma; जनभागीदारी को जन-आंदोलन का रूप दें&comma; समग्र सरकार के प्रयासों को मजबूती दें और सामूहिक संकल्प के साथ मिलकर बनाएँ—टीबी मुक्त बिहार।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला में मीडिया प्रतिनिधियों को टीबी मुक्त बिहार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए उनसे अपील की गई कि वे टीबी से संबंधित सही एवं तथ्यपरक जानकारी को आमजन तक पहुंचाने&comma; समय पर जांच एवं उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा टीबी से जुड़े भ्रम एवं सामाजिक भेदभाव को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है&comma; बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने&comma; समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने और टीबी से जुड़े सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य में टीबी की शीघ्र पहचान&comma; गुणवत्तापूर्ण उपचार&comma; टीबी निवारक उपचार तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप को और मजबूत किया जा रहा है। उच्च जोखिम वाले गांवों एवं शहरी वार्डों में टीबी की शीघ्र पहचान तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के कई पदाधिकारी&comma; राज्य स्वास्थ्य समिति के कई पदाधिकारी&comma; चिकित्सक एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के साथ अन्य सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि और मीडिया के सहयोगियों ने शामिल हुए।<&sol;p>&NewLine;

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