हमरा गऊवे में पंचायत बा” की प्रस्तुति ने दिखाई पंचायत चुनाव की झलक 

<p><strong>फुलवारीशरीफ&lpar;अजित यादव&rpar;&colon;<&sol;strong> सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच &lpar;एस&period; एस&period;एम&period;&rpar; की सप्ताहिक नुक्कड़ नाटक की श्रृंखला में महेश चौधरी के द्वारा लिखित एवं निर्देशित &&num;8220&semi;हमरा गऊवे में पंचायत बा&&num;8221&semi; की प्रस्तुति वाल्मी&comma; फुलवारीशरीफ में की गई। नाटक की शुरुआत सौरभ राज के स्वरबध्द गीत- गांव के मुखिया गांव के सेवक और सरपंच बनाईब हो&comma; पांच देव से गांव के झगड़ा गऊवे में फरीयाइब हम कचहरीया ना जाईब&&num;8230&semi;&period;&period; से की गई&period;<&sol;p>&NewLine;<p>इस नाटक के माध्यम से ग्रामवासियों को जागरूक किया गया की गांव के आपसी विवाद झगड़े मनमुटाव आदि के मुकदमों को लेकर थाना&comma; कोर्ट&comma; कचहरी में ना जाने से बचने के लिए बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के तहत ग्राम कचहरी की स्थापना का प्रधान किया गया है ताकि गांव में रह रहे लोगों को सुलभ और सस्ता न्याय मिल सके&period;<&sol;p>&NewLine;<p>भारत देश की अधिकांश जनता गांव में रह रही है और वही गुजर-बसर कर रही है क्योंकि अभी भी कई परिवार गांव में रहकर खेती-बाड़ी और अन्य कार्यों से अपना जीवन यापन कर रहे हैं गांवों में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रत्येक गांव में ग्राम कचहरी की न्यायपीठ किसी भी मामले की सुनवाई करते समय पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण समझौता करा कर भाई-भाई में प्रेम बरक़रार रखने का प्रयास करती है ताकि गांव की आपसी एकता और सद्भाव बनी रहे&period; नाटक के कलाकार महेश चौधरी&comma; मोनिका&comma; सौरभ&comma; अमन&comma; प्रमोद&comma; करण&comma; नमन&comma; यश&comma; आर्यन&comma; वीरअभिमन्यु&comma; शांभवी&comma; वैभव&comma; रणवीर&comma; अमरजीत&comma; आशीष&comma; आयुष&comma; कामेश्वर एवं सुरेंद्र प्रसाद थे।<&sol;p>&NewLine;

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