प्रेमलोक मिशन स्कूल : तपती गर्मी में भी हरियाली का ठंडा अहसास

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित<&sol;strong>। संपतचक प्रखंड के बैरिया स्थित प्रेमलोक मिशन स्कूल अपनी हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के लिए इन दिनों खास पहचान बना रहा है&period; भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच इस परिसर में कदम रखते ही ठंडी हवा का एहसास और सुकून भरा माहौल लोगों को आकर्षित कर रहा है&period; विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही पेड़-पौधों की हरियाली मन और मस्तिष्क को शीतल कर देती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रकार के पुष्प&comma; औषधीय पौधे और बड़े-बड़े वृक्ष लगाए गए हैं&comma; जो इसे एक जीवंत हरित परिसर का रूप देते हैं&period; इस पूरे वातावरण को विकसित करने का श्रेय विद्यालय के निदेशक और प्रख्यात शिक्षाविद् व पर्यावरणविद् गुरुदेव श्री प्रेम को जाता है&period; उन्होंने लाखों पौधों को जीवित रूप में स्थापित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया है&comma; जिसके लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है&period; यह सम्मान उन्हें राष्ट्रपति के हाथों प्राप्त हुआ था। गुरुदेव श्री प्रेम न केवल अपने विद्यालय परिसर में हरियाली को बढ़ावा देते हैं<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में जाकर पौधरोपण अभियान चलाते हैं&period; वे लोगों के बीच पौधे वितरित करते हैं और पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करते हैं&period; उनका मानना है कि &OpenCurlyDoubleQuote;प्रकृति के साथ चलना ही मानवता के हित में है&comma; प्रकृति के साथ छेड़छाड़ विनाश का कारण बनती है। विद्यालय परिसर उनकी सोच का सजीव उदाहरण है&comma; जहां वे स्वयं पेड़-पौधों की देखभाल&comma; सफाई और संरक्षण में सक्रिय रहते हैं&period; वे नियमित रूप से पौधों की देखरेख करते हैं और हरियाली को बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत श्रम करते हैं। गौरतलब है कि गुरुदेव श्री प्रेम भारतीय लोकहित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं&period; उनका यह प्रयास न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;

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