जिले में सुरक्षित व संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रहा है पीएमएसएमए अभियान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong> जिले में सुरक्षित व संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिये विभागीय स्तर से कई जरूरी पहल किये जा रहे हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में उच्च गुणवत्ता वाली मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं की उपब्धता&comma; संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों के क्षमतावर्द्धन व समुदाय स्तर पर इसे लेकर संचालित जन जागरूकता अभियान के साथ जिले में संचालित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का सफल संचालन इस दिशा में बेहद कारगर व प्रभावी साबित हो रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने के 09 व 21 तारीख को जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष शिविर आयोजित कर गर्भवती महिलाओं को जरूरी जांच&comma; दवा व महत्वपूर्ण चिकित्सकीय परामर्श संबंधी सेवा उपलब्ध कराया जाता है&period; इसकी मदद से प्रसव संबंधी जटिल मामलों की पहचान व समय रहते इसका कुशल प्रबंधन आसान हुआ है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सितंबर महीने में हाई रिस्क प्रिगनेंसी के 109 मामले चिह्नित<br &sol;>जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम संतोष कुमार ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के सफल आयोजन से हाई रिस्क प्रिंगनेंसी के मामलों की पहचान आसान हुई है&period; इससे समय रहते इसका प्रबंधन संभव हो रहा है&period; उन्होंने बताया कि बीते अगस्त महीने में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत कुल 1013 गर्भवती महिलाओं का एएनसी जांच किया गया&period; इसमें हाई रिस्क प्रिगनेंसी के 97 मामले चिह्नित किये गये&period; इसी तरह सितंबर महीने में पीएमएसएमए अभियान के तहत 1382 महिलाओं का एएनसी जांच करते हुए हाई रिस्क प्रिगेनेंसी के कुल 109 मामले चिह्नित किये गये&period; सितंबर महीने में पीएमएसएमए अभियान के क्रम में 1355 गर्भवती महिलाओं की हेमोग्लोबीन&comma; 779 महिलाओं का ब्लड ग्रुप&comma; 1138 महिलाओं का यूरिन एलब्यूमिन&comma; 201 महिलाओं का ओजीटीटी&comma; 1253 महिलाओं का एचआईवी&comma; 876 महिलाओं का सिफलिस जांच किये जाने की जानकारी उन्होंने दी&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आसान हुई है प्रसव संबंधी जटिल मामलों की पहचान<br &sol;>सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्रों पर मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता व पहुंच पहले की तुलना में बेहतर हुई है&period; सुविधाजनक तरीके से गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व सभी जरूरी जांच संबंधी सुविधा उपलब्ध हो रहा है&period; लिहाजा नियमित अंतराल पर महिलाओं का एएनसी जांच संभव हुआ है&period; इससे गर्भावस्था से संबंधित जटिल मामलों का समय पर पता लगा कर इसे आसानी से प्रबंधित किया जा रहा है&period; जो जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो रहा है<&sol;p>&NewLine;

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