बेहतर बुनियादी स्वास्थ्य सेवा की मिसाल है पिठौरा आयुष्मान आरोग्य मंदिर

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong> समुदाय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने में जिले में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिर महत्वपूर्ण किरदार निभा रहा है। आरोग्य मंदिर के कर्मियों की सक्रियता लोगों की जान बचाने में सहायक साबित हो रहा है। इस तरह के वाकयों में उनके त्वरित व कुशल कार्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसा ही एक वाकया पिठौरा आयुष्मान आरोग्य मंदिर से जुड़ा है। कुछ महीने पहले की बात है करीब सात महीने की एक दुबली-पतली बच्ची के लगातार रोने की आवाज आगंतुक व पिठौरा आयुष्मान आरोग्य मंदिर की पूरी टीम का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करता है। बेहद कमजोर उस बच्ची का चेहरा झुलसा हुआ था। वो लगातार रो रही थी। बच्ची के सर्दी-खांसी से ग्रसित होने की शिकायत लेकर उसकी मां चांदनी परवीन क्षेत्र के आंगनबाड़ी सेविका की सलाह पर बच्ची के इलाज के लिये पिठौरा आरोग्य मंदिर इलाज के लिये पहुंची थी। सीएचओ प्रियंका ने बच्ची की गहन जांच में पाया कि बच्ची किसी तरह के शारीरिक गतिविधि ही नहीं खुद से बैठने में भी असमर्थ है। अति गंभीर कुपोषित बच्ची के रूप में उसे चिह्नित किया गया। और फिर सीएचओ प्रियंका सहित अन्य सहयोगी कर्मियों की लंबी जद्दोजहद के बाद बच्ची के परिजन उन्हें एनआरसी में दाखिल करने के लिये राजी हुए। स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयास के दम पर बच्ची आज पूरी तरह सुरक्षित व स्वस्थ है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>काफी जद्दोजहद के बाद बचाई जा सकी बच्ची की जान<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस वाकया का जिक्र करते हुए सीएचओ प्रियंका बताती है कि बच्ची की मां व अन्य परिजन उसे एनआरसी सेंटर में दाखिल करने के लिये राजी नहीं थे। बच्ची को एनआरसी में दाखिल कराने के लिये परिजनों को राजी करने के तमाम प्रयास को विफल होता देख उसकी मां को बच्ची के फॉलोअप के लिये दोबारा आरोग्य मंदिर आने के लिये कहा गया। दोबारा बच्ची के आने पर नरपतगंज पीएचसी के चिकित्सा प्रभारी बच्ची के समुचित जांच के बाद उसे तत्काल एनआरसी में भर्ती कराने पर जोर दिया। बावजूद परिजन राजी नहीं थे। बावजूद प्रियंका ने हिम्मत नहीं हारा। और कई महीनों तक बच्ची का फॉलोअप करते हुए आखिरकार वो बच्ची को एनआरसी में दाखिल करने के लिये परिजन को राजी करने में सफल रही।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>एक मॉडल के रूप में है आरोग्य मंदिर की है पहचान<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नरपतगंज प्रखंड के पिठौरा आयुष्मान आरोग्य मंदिर को जिले में एक मॉडल के तौर पर देखा जाता है। स्वास्थ्य संबंधी मामलों के प्रति समुदाय को जागरूक करने व लेकर बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता इसे एक अलग पहचान दिलाता है। पहले हर महीने यहां ओपीडी में सौ से दौ सौ लोगों का इलाज होता था। वहीं अब इसकी संख्या सात सौ तक जा पहुंची है। आरोग्य मंदिर में ओपीडी&comma; एनसीडी&comma; इम्यूनाइजेशन&comma; एएनसी जांच&comma; टीबी सहित अन्य गंभीर संक्रामक रोगों के बेहतर स्क्रीनिंग के साथ-साथ रेफरल सुविधा भी उपलब्ध है। सीएचओ प्रियंका इसके लिये स्थानीय मुखिया मौ जैनुल हक के प्रयास&comma; संस्थान में कार्यरत कर्मियों की सक्रियता व उच्चाधिकारियों के सहयोग व समर्थन के साथ जन आरोग्य समिति सदस्यों की सक्रिय भागीदारी को जिम्मेदार बताती है। संस्थान में निर्धारित 151 में 131 आवश्यक दवाओं की उपलब्धता हमेशा बनी रहती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>राज्य स्तरीय अधिकारी भी कर चुके हैं संस्थान की तारीफ<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पिठौरा आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर उपलब्ध चिकित्सकीय इंतजाम सराहनीय है। बीते 08 जुलाई को संस्थान के निरीक्षण के क्रम में पहुंचे क्वालिटी एश्योरेंस के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ बीके मिश्रा भी पिठौरा आयुष्मान आरोग्य मंदिर में उपलब्ध चिकित्सकीय इंतजाम पर संतोष व्यक्त करते हुए इसकी तारीफ कर चुके हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>जल्द एनक्वास प्रमाणीकृत होगा संस्थान<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डिस्ट्रिक्ट गुणवत्ता यकीनन पदाधिकारी डीसीक्यूए डॉ मधुबाला ने बताया कि पिठौरा आयुष्मान आरोग्य मंदिर जल्द ही एनक्वास प्रमाणीकृत संस्थान की सूची में शामिल होगा। उन्होंने बताया कि संस्थान में उपलब्ध सेवाओं को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने का प्रयास युद्धस्तर पर जारी है। एनक्वास विभिन्न स्तरों पर इसका मूल्यांकन व अनुश्रवण किया जा रहा है। ताकि संस्थान को जल्द एनक्वास प्रमाणीकरण प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जा सके।<&sol;p>&NewLine;

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