पटना : यूनानी चिकित्सा अनुसंधान में बिहार को नई पहचान दे रहा RRIUM

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटनासिटी&comma; रॉबीन राज।<&sol;strong> क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान जो कि CCRUM&comma; आयुष मंत्रालय&comma; भारत सरकार के अधीन संचालित है। यूनानी चिकित्सा क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान बना रहा है। यह संस्थान NABH एवं NABL M&lpar;EL&rpar;T मान्यता प्राप्त है और क्लिनिकल रिसर्च&comma; स्वास्थ्य सेवा एवं सामुदायिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>1979 में स्थापित क्लिनिकल रिसर्च यूनिट के आधार पर 1984 से यह केंद्र पूर्ण विकसित अनुसंधान एवं स्वास्थ्य सेवा संस्थान के रूप में कार्यरत है। ओपीडी&comma; आईपीडी&comma; लैबोरेट्री और रेजीमेंनल थेरेपी की आधुनिक सुविधाएँ इसे राज्य का प्रमुख यूनानी स्वास्थ्य केंद्र बनाती हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उप निदेशक मुमताज़ अहमद ने जानकारी देते हुए बताया की संस्थान ने अब तक 43 क्लिनिकल परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। हाल ही में 6 नए परीक्षण पूरे हुए — अपच&comma; दाद&comma; अनिद्रा&comma; बवासीर&comma; सेरेब्रो-एस्थेनिया एवं ज्वर पर आधारित। 5 नए क्लिनिकल परीक्षण भी पूरे — अपच&comma; दमा&comma; ल्यूकोरिआ&comma; पोस्ट मिक्चुरिशन ड्रिब्ल&comma; खांसी जैसे रोगों पर। सफेद दाग&comma; फाइलेरिया&comma; रूमेटॉयड आर्थराइटिस&comma; मलेरिया&comma; काला-आजार सहित कई बीमारियों पर शोध के लिए विशेष सराहना मिली। इसके साथ ही रिसर्च ओपीडी&comma; जनरल ओपीडी&comma; जराचिकित्सा&comma; RCH&sol;पेडियाट्रिक&comma; NCD ओपीडी&comma; PTA एवं रेजीमेंनल थेरेपी ओपीडी संचालित। 25-बेड का सक्रिय आईपीडी—रिसर्च सपोर्टेड इनडोर केयर&period; रेजीमेंनल थेरेपी में कपिंग&comma; मालिश&comma; जोंक थेरेपी&comma; हॉट फर्मेंटेशन आदि सेवाएँ उपलब्ध।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रतिवर्ष 2 ग्रामीण&sol;शहरी स्थलों पर मोबाइल हेल्थ सेवाएँ। 1986 से स्कूल हेल्थ कार्यक्रम — अब तक 2 लाख बच्चों को लाभ। 2019 से SCSP&sol;TSP कार्यक्रम के तहत वंचित समुदायों के लिए स्वास्थ्य सुविधा। पोषण माह&comma; सतर्कता सप्ताह&comma; स्वच्छता अभियान सहित कई जागरूकता कार्यक्रम। मोबाइल सेवाओं के दौरान का संचालन। वहीं स्वास्थ्य शिविर&comma; मेलों और ग्रामीण आउटरीच गतिविधियों में नियमित सहभागिता। सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क यूनानी चिकित्सा उपलब्ध। वर्तमान में फंक्शनल डिस्पेप्सिया&comma; ब्रोंकियल अस्थमा खांसी&comma; ल्यूकोरिआ&comma; पोस्ट मिक्चुरिशन ड्रिब्ल पर चल रहा अनुसंधान।<&sol;p>&NewLine;

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