बेटे का नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट बनवाने में फंसेपटना एम्स निदेशक डॉ जी के पाल को एम्स निदेशक पद से हटाया गया

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना &comma; अजीत &period;<&sol;strong> पटना एम्स के निदेशक डॉक्टर गोपाल कृष्ण पाल को आखिरकार भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स पटना के निदेशक पद से हटा दिया&comma; एम्स निदेशक डॉक्टर गोपाल कृष्ण पाल पर अपने बेटे औरो प्रकाश पाल का नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट बनवाने का आरोप लगा था&period; इस मामले के उजागर होने के बाद भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जांच कमेटी गठित की थी&period; बताया जाता है कि दो सदस्य वाली जांच कमेटी ने भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी इसके बाद मंगलवार को भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए पटना एम्स के निदेशक डॉक्टर गोपाल कृष्ण पाल को हटा दिया और उनके जगह पर देवघर के एम्स निदेशक डॉक्टर सौरभ वाष्र्णेय को एम्स पटना का निदेशक का प्रभार सौंपा है&period; अब अगले तीन माह तक डॉक्टर सौरभ वार्ष्णेय ने पटना एम्स के प्रभारी निदेशक रहेंगे&period; इस संबंध में बातचीत करने के लिए डॉक्टर गोपाल कृष्ण पाल ने अपना फोन रिसीव नहीं किया&period; वही फिलहाल इस मामले में पटना एम्स के किसी भी अधिकारी कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बता दे कि एम्स निर्देश के पद पर रहते हुए डॉक्टर गोपाल कृष्ण पाल गोरखपुर एम्स के भी निदेशक के प्रभार में थे&period; इस दौरान उन पर अपने बेटे औरो प्रकाश पाल का पटना से नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट बनवाकर गोरखपुर एम्स में पीजी में दाखिला दिलाने का मामला तूल पकड़ लिया था&period;4 सितंबर 2024 को इस मामले की की शिकायत की गई थी&period; इसके अलावा उनकी बेटी का पटना एम्स में दाखिला भी विवादों में रहा है&period; भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इसकी जांच कराई गई जिसके बाद डॉ गोपाल कृष्ण पर लगे आरोप को सही पाया गया&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बता दे की डॉक्टर गोपाल कृष्ण पाल ने पूर्व में बयान दिया था कि उन पर लगे आरोप निराधार है और वह जांच कमेटी के सामने अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे&period;जाँच कमेटी के सामने उन्होंने अपना पक्ष रखा लेकिन जांच कमेटी ने उनके ऊपर लगे आरोपी को सही पाया और उनकी बातों को ख़ारिज कर दिया&period; बताया जाता है कि मामला के तूल पकड़ने के बाद डॉक्टर पाल ने अपने बेटे का दाखिला रद्द कर दिया था उसके बावजूद मामला नहीं थमा और उन्हें अंततः पटना एम्स के निदेशक पद को गांवना पड़ा&period;<&sol;p>&NewLine;

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