हिन्दू दर्शन ही विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा : अम्बरीष

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> पटना स्थित गांधी संग्रहालय के सभा कक्ष में विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना दिवस मनाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री व अखिल भारतीय विशेष संपर्क के प्रमुख माननीय अम्बरीष जी&comma; विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रन्यासी पद्मश्री डॉक्टर आर&period; एन&period; सिंह जी उपस्थित थे । कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष माननीय आदित्य जालान जी ने की। सैकड़ों की संख्या में उपस्थित प्रबुद्ध जनो को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री माननीय अम्बरीष जी ने कहा कि &&num;8220&semi;स्वतंत्रता के पश्चात सेक्युलरवाद के नाम पर हिन्दू समाज के साथ बढ़ते अन्याय तथा ईसाईयों व मुसलमानों के तुष्टीकरण के बीच 1957 में आई नियोगी कमीशन की आंखें खोल देने वाली रिपोर्ट ने हिन्दू समाज के कर्णधारों की नींद उड़ा दी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-large"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;newscrime24&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2025&sol;08&sol;img-20250817-wa00206398417386853594000-487x365&period;jpg" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-74397" &sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रिपोर्ट में ईसाई मिशनरियों द्वारा छल&comma; कपट&comma; लोभ&comma; लालच व धोखे से पूरे देश में हिंदुओं के धर्मांतरण की सच्चाई सामने आने के बावजूद केंद्र सरकार ने इसे रोकने के लिए प्रभावी केंद्रीय कानून बनाने से स्पष्ट मना कर दिया। इसके अलावा हिन्दू समाज में भी अनेक आंतरिक संघर्ष चल रहे थे जिनके कारण भी देश का संत समाज चिंतित था। विदेशों में रहने वाला हिन्दू समाज भी अपनी विविध समस्याओं के समाधान हेतु भारत की ओर ताक तो रहा था किन्तु केंद्र सरकार के हिन्दुओं के प्रति उदासीन रवैए के कारण वह भी निराश था। ऐसे में हिन्दू समाज के जागरण और संगठन की आवश्यकता महसूस होने लगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परमपूज्य श्री गुरुजी की प्रेरणा समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में कार्य करने वाली सज्जन शक्तियों की एक बैठक बुलाई गई । यह बैठक 29 अगस्त 1964 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पवई&comma; मुम्बई स्थित पूज्य स्वामी चिनमयानन्द जी के आश्रम सांदीपनि साधनालय में बुलाई गई। इसमें पूज्य स्वामी चिनमयानन्द&comma; राष्ट्रसंत तुकडो जी महाराज&comma; सिख सम्प्रदाय से माननीय मास्टर तारा सिंह&comma; जैन सम्प्रदाय से पूज्य सुशील मुनि&comma; गीता प्रेस गोरखपुर से हनुमान प्रसाद पोद्दार&comma; के&period; एम&period; मुंशी तथा पूज्य श्री गुरुजी सहित 40-45 अन्य महानुभाव भी उपस्थित थे। इसी दिन इन महा-पुरुषों ने विश्व हिंदू परिषद के गठन की घोषणा कर दी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>22 से 24 जनवरी 1966 को कुम्भ के अवसर पर 12 देशों के 25 हज़ार प्रतिनिधियों की सहभागिता के साथ प्रथम विश्व हिंदू सम्मेलन प्रयाग में आयोजित किया गया। 300 प्रमुख संतों की सहभागिता के साथ पहली बार प्रमुख शंकराचार्य भी एक साथ आए और धर्मांतरण पर रोक व परावर्तन &lpar;घरवापसी&rpar; का संकल्प लिया गया। मैसूर के महाराज मा० चामराज जी वाडियार को अध्यक्ष व दादासाहब आप्टे को पहले महामंत्री के रूप में घोषित कर विहिप की प्रबंध समिति की घोषणा भी हुई। इस सम्मेलन में जहां परावर्तन को मान्यता देने का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हुआ वहीं विहिप के बोध वाक्य &&num;8216&semi;धर्मो रक्षति रक्षितः&&num;8217&semi; और बोध चिह्न &&num;8216&semi;अक्षय वटवृक्ष&&num;8217&semi; भी तय हुआ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर का मत था कि यदि देश के संत महात्मा मिलकर यह घोषित कर दें कि हिन्दू धर्म-शास्त्रों में छुआछूत का कोई स्थान नहीं है तो इस अभिशाप को समाप्त किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 13-14 दिसम्बर 1969 के उडुपी धर्म संसद में संघ के तत्कालीन सर-संघचालक श्री गुरूजी के विशेष प्रयासों के परिणाम स्वरूप&comma; भारत के प्रमुख संतों ने एकस्वर से &&num;8216&semi;हिन्दव&colon; सोदरा सर्वे&comma; ना हिन्दू पतितो भवेत्&&num;8217&semi; के उद्घोष के साथ सामाजिक समरसता का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>1994 में काशी में हुई धर्म संसद का निमंत्रण डोम राजा को देने पूज्य संत ना सिर्फ स्वयं चलकर गए बल्कि उनके घर का प्रसाद ग्रहण किया तथा अगले दिन डोम राजा धर्म संसद के अधिवेशन में संतों के मध्य बैठे और संतों ने उन्हें पुष्प हार पहनाकर स्वागत किया। इस धर्म संसद में 3500 संत उपस्थित थे। वनवासी&comma; जनजाति&comma; अति पिछड़ी व पिछड़ी जाति के हज़ारों लोगों को ग्राम पुजारी के रूप में प्रशिक्षण देकर उनका समय-समय पर अभिनन्दन व मंदिरों में पुरोहित के रूप में नियुक्ति विहिप के ग्राम पुजारी प्रशिक्षण अभियान के कारण ही संभव हुई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विहिप की युवा शाखा बजरंग दल तथा दुर्गा वाहिनी ने 1984 से लेकर आज तक देश-धर्म संस्कृति व राष्ट्र की रक्षार्थ सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। सेवा&comma; सुरक्षा व संस्कार इनके मूल मंत्र रहे हैं। संस्कृत भाषा&comma; वेद पाठशाला तथा संस्कारों की अभिवृद्धि हेतु भी विहिप ने अनेक कदम उठाए हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा किए गए इन विभिन्न कार्यों तथा सफल आन्दोलनों के कारण हिन्दू दर्शन आज सम्पूर्ण विश्व के केंद्र में आ चुका है। अब विश्व को लगने लगा है कि हिन्दू दर्शन ही विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।&&num;8221&semi;<br &sol;><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत विशेष संपर्क प्रमुख राजीव रंजन जी प्रांत सेवा प्रमुख सुग्रीव प्रसाद &comma;प्रांत गोरक्षा सचिव रविंद्र राणा प्रांत के मंत्री संतोष सिसोदिया &comma; प्रांत कार्य समिति सदस्य गीता सिंह &comma;बजरंग दल विद्यार्थी प्रमुख अभिषेक राजाजी &comma; बजरंग दल के जिला संयोजक सागर जिला मंत्री राकेश रमन &comma; जिला के अध्यक्ष&comma;साकेत &comma;बंशीधर त्रिपाठी &comma; पंकज कुमार &comma;ओम प्रकाश सहित सैकड़ो की संख्या में गणमान्य उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

मसौढ़ी में 16 वर्षीय किशोर की हत्या का खुलासा, 24 घंटे में मुख्य आरोपी गिरफ्तार!

महाशिवरात्रि को लेकर पटना प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा व यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश

राष्ट्रीय महिला दिवस पर 253 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया