स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए एम्स पटना में प्रशिक्षकों का राष्ट्रीय प्रशिक्षण शुरू

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सफल स्तनपान के दस कदमों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए मातृत्व स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं का चार दिवसीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार से शुरू हुआ&period; बाल रोग विभाग और ब्रेस्टफीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया&comma; दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह प्रशिक्षण 7 से 10 सितंबर तक चलेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऐसे मास्टर ट्रेनर तैयार करना है&comma; जो आगे बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में डॉक्टरों&comma; नर्सों और एएनएम को स्तनपान को बढ़ावा देने और माताओं को आवश्यक सहयोग एवं परामर्श देने के लिए प्रशिक्षित करेंगे&period; विशेषज्ञों के अनुसार शिशु के जन्म के बाद समय पर स्तनपान शुरू कराने और इसे सही तरीके से जारी रखने से शिशु मृत्यु दर तथा कुपोषण को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; ब्रिगेडियर डॉ&period; राजू अग्रवाल&comma; चिकित्सा अधीक्षक प्रो&period; डॉ&period; प्रशांत कुमार सिंह&comma; कोर्स निदेशक डॉ&period; के&period; केसावलु&comma; मुख्य नर्सिंग अधिकारी तथा अन्य संकाय सदस्यों ने दीप प्रज्वलित कर किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यकारी निदेशक प्रो&period; ब्रिगेडियर डॉ&period; राजू अग्रवाल ने कहा कि स्तनपान बच्चे के लिए पहला टीका है और उसके जीवनभर के स्वास्थ्य की नींव तैयार करता है&period; उन्होंने कहा कि एम्स पटना अस्पताल को शिशु अनुकूल अस्पताल के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>चिकित्सा अधीक्षक प्रो&period; डॉ&period; प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में संस्थागत प्रसव की दर में वृद्धि हुई है&comma; लेकिन जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराने की प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है&period; अस्पतालों में माताओं को सही परामर्श और व्यवहारिक सहयोग उपलब्ध कराना इस दिशा में महत्वपूर्ण है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कोर्स निदेशक एवं बीपीएनआई के प्रशिक्षण समन्वयक डॉ&period; के&period; केसावलु ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि बिहार में वर्तमान में जन्म के बाद शीघ्र स्तनपान शुरू करने की दर करीब 51 प्रतिशत है&period; प्रशिक्षण के माध्यम से इसे शत-प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राष्ट्रीय शिशु एवं युवा बाल आहार प्रशिक्षक डॉ&period; सुनीता कात्यायन&comma; रांची और मनीष कुमार&comma; पटना प्रशिक्षण का संचालन कर रहे हैं&period; एम्स पटना की कॉलेज ऑफ नर्सिंग की ट्यूटर दीप्ति दास स्थानीय कोर्स समन्वयक के रूप में नियोनेटोलॉजिस्ट और स्तनपान परामर्श टीम के साथ कार्यक्रम का समन्वय कर रही हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रशिक्षण में एम्स पटना के विभिन्न संवर्गों के डॉक्टरों&comma; नर्सिंग ट्यूटरों और नर्सिंग अधिकारियों समेत करीब 21 मातृत्व स्वास्थ्य सेवा प्रदाता भाग ले रहे हैं&period; प्रशिक्षण के दौरान माताओं को स्तनपान के लिए परामर्श देने की तकनीक&comma; शिशु को स्तनपान कराने की सही स्थिति एवं पकड़&comma; स्तनपान से जुड़ी सामान्य कठिनाइयों के समाधान तथा अस्पताल आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;

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