नरपतगंज-बिहार सरकार के उदासीन रवैये से अतिरिक्त प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज बदहाल

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">अररिया&comma; रंजीत ठाकुर। <&sol;mark><&sol;strong>नरपतगंज प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत नवाबगंज पंचायत में 1955 ई० में बने &&num;8220&semi;अतिरिक्त प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र&comma;&&num;8221&semi; बिहार सरकार की रवैये से अपने बदहाली पर आंसू बहा रही है। बताते चले कि 68 वर्ष पुराना भवन है&comma; जो जर्जर स्थिति में हो गया है। जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। अस्पताल परिसर में ही 10 वर्ष पूर्व करोड़ों की लागत से एम एस डी पी &lpar;msdp&rpar; योजना से नये भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था जिसे संवेदक ने आधा अधूरा बना कर छोड़ दिया है और भाग गया है। जिसको लेकर आज 10 वर्षों से स्थानीय लोगों के द्वारा जिला पदाधिकारी&comma;एवं सिविल सर्जन अररिया&comma; सांसद अररिया&comma; विधायक नरपतगंज&comma; को कई बार लिखित व मौखिक जानकारी दिया गया है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अस्पताल प्रशासन के द्वारा भी बार-बार भवन के संबंध में उच्चाधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों को कहा जा रहा है परंतु किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है। भवन नहीं बनने से अस्पताल कर्मियों को काफी कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है&comma; तो वहीँ आम लोगों को भी इलाज कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासकर महिलाओं को इलाज करवाने में काफी परेशानी होती है। जबकि अस्पताल में कार्यरत दो डॉक्टर कविता कुमारी एवं मोहम्मद रजीहुद्दीन थे जो लगभग एक माह से अस्पताल से अन्यत्र ड्यूटी कर रहे हैं&comma; जिससे क्षेत्र के लोगों को काफी कठिनाई होती है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वहीं एएनएम रिंकू कुमारी&comma; रीना कुमारी&comma; जीएनएम हरि बिलोनिया&comma; कार्यालय परिचारीक शंभू प्रसाद यादव&comma;एवं तीन सुरक्षा गार्ड मौजूद रहते हैं। प्रतिमाह लगभग 500 से 1000 मरीजों का इलाज किया जाता है&comma; जबकि लगभग 40 से 50 महिलाओं का प्रसव भी कराया जाता है। क्षेत्र के लोगों के लिए यह अस्पताल संजीवनी के बराबर है। लेकिन राजनेताओं से लेकर पदाधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती है। अस्पताल क्षेत्र की आबादी लगभग 5 लाख की है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वहीं अस्पताल परिसर में सुलभ शौचालय&comma;नलकूप का भी व्यवस्था नहीं है। दूरदराज से आए मरीजों एवं पदाधिकारियों को काफी संकटों से गुजरना पड़ता है। बिहार सरकार के द्वारा विकास की बात केवल कागजों पर ही सिमट कर रह जाता है ऐसा प्रतीत हो रहा है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>क्या कहते हैं चिकित्सा पदाधिकारी&comma; डॉ ओमप्रकाश मंडल नरपतगंज&&num;8212&semi;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>इस बाबत डॉ ओमप्रकाश मंडल बताते हैं कि मेरा पोस्टिंग दो माह पूर्व हुआ है&comma; अस्पताल का पुराना भवन जो 1955 में बना था जर्जर हो गया है जिससे कर्मी को इलाज करने में काफी परेशानी होती है वहीं परिसर में ही 10 बर्ष पूर्व नए भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था&comma; परन्तु कार्य अधूरा छोड़ संवेदक चला गया है। जिसको लेकर मेरे द्वारा भी सिविल सर्जन अररिया&comma; जिला पदाधिकारी अररिया एवं क्षेत्रीय विधायक&comma; सांसद को इसकी जानकारी दिया गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्थानीय ग्रामीण कहते हैं कि&comma; अस्पताल में सभी कर्मी नियमित रूप से रहते हैं। डॉक्टर को नहीं रहने से बीमारियों को इलाज कराने में काफी परेशानी होती है। अस्पताल परिसर भी मरीजों के लिए अव्यवस्थित है। परिसर को मवेशी का चारागाह बना कर &comma;अधूरे भवन का अतिक्रमण कर आपत्तिजनक सामानों का जमावड़ा कर अवांक्षित गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है। ग्रामीणों ने कहा समय रहते भवन निर्माण कार्य पूर्ण एवं सभी कुव्यवस्था को व्यवस्थित नहीं कराया गया तो हम लोग बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।<&sol;p>&NewLine;

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