म्हाकवि डॉ कुँअर बेचैन फाउंडेशन ने की कवितायन काव्य गोष्ठी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>गाज़ियाबाद&comma; à¤°à¤¾à¤œ कौशिक<&sol;strong> à¤®à¤¹à¤¾à¤•वि डॉ कुँअर बेचैन फाउंडेशन की तरफ से नेहरू नगर मे कवितायन काव्य गोष्ठी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई &vert; कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर मंगल नसीम ने की और मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि जय सिंह आर्य रहे &vert; विशिष्ट अतिथि के रूप मे प्रसिद्ध कवि देवेन्द्र मिर्ज़ापुरी उपस्थिति थे&vert; प्रख्यात कवयित्री व संगीत की ज्ञाता डॉ तारा गुप्ता&comma;  à¤ªà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हास्य कवि  à¤¡à¥‰ प्रवीण शुक्ल और महाकवि डॉ कुँअर बेचैन फाउंडेशन संस्था के संरक्षक शरद रायज़ादा के सान्निध्य मे कवितायन काव्य गोष्ठी 5 घँटे चली।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सभी सम्मानित कवियों ने माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारम्भ किया &vert; मंच संचालन युगल जोड़ी डॉ अंजू सुमन साधक और मृत्युंजय साधक ने किया &vert; मृत्युंजय साधक ने अपनी मधुर वाणी से सरस्वती वंदना करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया &vert; पाँच घंटे तक लगातार चली गोष्ठी मे सर्व श्री मंगल नसीम&comma; देवेंद्र मिर्ज़ापुरी&comma; डॉ प्रवीण शुक्ल&comma; जय सिंह आर्य &comma; डॉ तारा गुप्ता&comma; डॉ० तूलिका सेठ&comma; डॉ० अल्पना सुहासिनी&comma; श्रीमती वंदना कुँअर&comma; सुश्री गार्गी कौशिक&comma; विनोद यादव &comma; दुर्गेश अवस्थी&comma; कुलदीप बरतरिया&comma; बी०एल बत्रा&comma; राजीव सिंहल&comma; मधु श्रीवास्तव&comma; सुरेन्द्र शर्मा&comma; पूनम माटिया&comma; डॉ० बीना शर्मा&comma; ईश्वर सिंह तेवतिया&comma; डॉ श्वेता त्यागी&comma; सोनम यादव&comma; उमेश प्रेमी&comma; डॉ० अंजु सुमन साधक एवं मृत्युंजय साधक ने बहुत सुंदर काव्य पाठ किया &vert; हापुड़ से पधारे शिव कुमार त्यागी ने अतिथियों को अपनी पुस्तक भेंट की। गोष्ठी में दुष्यंत सक्सेना&comma; अचिंत सक्सेना&comma; मंजू सक्सेना और मनोज बरतरिया आदि भी उपस्थित रहे।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिद्धार्थ रायज़ादा ने भी अपने विचार व्यक्त किए &vert; अंत मे संस्था के संरक्षक शरद रायज़ादा ने डॉ कुँअर बेचैन फाउंडेशन संस्था की ओर से सभी का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का समापन महाकवि डॉ कुँअर बेचैन जी के गीत &OpenCurlyDoubleQuote;बदरी बाबुल के अंगना जइयो” सामूहिक रूप से गाकर किया गया।<&sol;p>&NewLine;

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