पटना सिटी, (न्यूज क्राइम 24) ‘शहीद जगदेव अपने विचारों के कारण आज भी हमारे बीच ज़िंदा हैं। आज की युवा पीढ़ी को उनके विचारों को जानने के उपरांत उसे आत्मसात करना चाहिए’- यह बातें शहीद जगदेव प्रसाद की 102वीं जयंती पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कही। उन्होंने आगे कहा कि न्यायपालिका में पिछड़ों के प्रतिनिधित्व हेतु न्यायाधीश- चयन प्रक्रिया में बदलाव आवश्यक है।
कार्यक्रम का आयोजन कुशवाहा एकता कल्याण समिति द्वारा स्थानीय बेगमपुर स्थित शहीद जगदेव पार्क में सम्पन्न हुआ।जयंती कार्यक्रम का शुभारंभ मंचस्थ अतिथियों द्वारा शहीद जगदेव की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ।
इस अवसर पर पूर्व पार्षद शिव मेहता, दिनेश मेहता, शैलेंद्र कुमार वर्मा, इंजी०हेमंत कुमार, सूर्यकांत गुप्ता, युवा समाजसेवी रोशन मेहता, कुणाल सिकंद, बैंकर विजय कुमार,जयशंकर प्रसाद पिंटू, पंकज कुशवाहा, संतोष गिरि एवं शिक्षाविद् विजय कुमार सिंह आदि ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि शहीद जगदेव प्रसाद व्यवस्था परिवर्तन के लिए संघर्ष एवं अभियान के प्रतीक थे। वक्ताओं ने शहीद जगदेव को समाज में व्याप्त सामाजिक-आर्थिक ग़ैररबराबरी को समाप्त कर न्यायसम्मत समाज के निर्माण का पैरोकार बताया।
सभा को संबोधित करते हुए युवा नेत्री सुमन सौरभ ने कहा कि शहीद जगदेव जी के सपनों को साकार तब तक नहीं किया जा सकता है जब तक पिछड़े एवं अभिवंचितों तक शिक्षा की रोशनी नहीं पहुंचती है। इसी तरह पार्षद मनोज मेहता ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले, ई०वी०रामास्वामी पेरियार, डॉ०अंबेडकर और मानवतावादी रामस्वरूप वर्मा के विचारों को कार्यरूप देने वाले शहीद जगदेव प्रसाद ही थे। अपने संबोधन में स्थानीय वार्ड -62 की पार्षद तारा देवी ने कहा कि शहीद जगदेव प्रसाद ने सामाजिक असमानता खत्म करने हेतु ‘ब्राह्मण-भंगी एक समान’ की पैरवी की। उन्होंने पार्क को उत्तरोत्तर सुंदर बनाने हेतु अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर की।
सभा में अन्य लोगों में प्रमुख रूप से शंकर मेहता ,पप्पू मेहता ,चंद्रदीप प्रसाद, नरेश मेहता, सौरभ सागर ,अजय मेहता, परमानंद प्रसाद ,खुर्शीद अनवर, अलख मेहता, श्रवण मेहता आदि उपस्थित थे। सभा का संचालन अमरनाथ मेहता ने किया। अतिथियों का स्वागत अमित कुमार कुशवाहा ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन अनिल कुमार मेहता ने किया । सभा की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष विनय कृष्ण मौर्य ने की।