खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झांसी वाली रानी थी, लक्ष्मीबाई के स्वरूप में दिखी आंचल

&NewLine;<p>&lbrack;Edited By&colon; Robin Raj&rsqb;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&sol;पटनासिटी&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;strong> भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महानायिका झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि शुक्रवार को पटना सहित पूरे देश भर में मनाई गई&period; आज जिले के कोने-कोने से अनेक लोगों ने विभिन्न स्थानों पर झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की&period; इस बलिदान दिवस पर आंचल सिंह ने नारी शक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई के स्वरूप धारण कर लोगों को उनके प्रति आकर्षित किया &&num;8220&semi;खूब लड़ी मर्दानी&comma; वो तो झांसी वाली रानी थी&&num;8221&semi; उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में अपने सौंदर्य&comma; शौर्य और साहस की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई केवल महिलाओं ही नहीं पुरुषों के लिए भी प्रेरणा स्रोत मानी जाती हैं&period; इस मौके पर समाजसेवी अंजू सिंह ने कहा कि नारी शक्ति की अप्रतिम प्रतीक झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जी को उनकी पुण्यतिथि पर  श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं&comma; आपका बलिदानी जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए महान प्रेरणा है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>1858 में आज ही के दिन दिया था बलिदान-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>देश के प्रथम स्‍वतंत्रता संग्राम की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 18 नवम्बर 1828 को हुआ था&period; उन्‍होंने 18 जून 1858 को अपना बलिदान दिया। इस दिन को देश रानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस के रूप मनाता है&period; इतिहास के पन्‍नों में रानी की वीरगाथा सुनहरे अक्षरों में अंकित है&period; अपने जीवन की अंतिम लड़ाई में उन्‍होंने ऐसी वीरता दिखाई कि अंग्रेज तक उनके कायल हो गए&period; उनके बलिदानी जीवन से आज भी देश प्रेरणा लेता है&period; उन्‍होंने बड़ी वीरता से अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे&period; वह अंतिम सांस तक अंग्रेजों से लड़ती रहीं और अंतत&colon; वीर गति प्राप्‍त की।<&sol;p>&NewLine;

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