फाइलेरिया मुक्त पूर्णिया बनाना हमारी प्राथमिकता : डॉ आर पी मंडल

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> फाइलेरिया रोग के उन्मूलन के लिए पूर्णिया जिले में 10 फरवरी 2026 से शुरू किये जा रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के सफल किर्यान्वयन के लिए दिनांक 05 फरवरी को जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के सिविल सर्जन कार्यालय में जिला भेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल द्वारा मीडिया सहयोगियों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी मीडिया प्रतिनिधियों को 10 फरवरी से शुरू हो रहे सर्वजन दवा सेवन &lpar;एमडीए&rpar; कार्यक्रम की जानकारी देते हुए लोगों को इसका लाभ उठाकर फाइलेरिया से सुरक्षित रहने की आवश्यक जानकारी दी गई। इस दौरान डीएम&amp&semi;ई आलोक कुमार&comma; डब्लूएचओ जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ दिलीप कुमार भीडीसीओ रवि नंदन सिंह&comma; भीबीडीएस सोनिया मंडल&comma; सीफार रिवीजीनल कोऑर्डिनेटर सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी और सभी राष्ट्रीय&comma; लोकल प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में जिला भेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ आर पी मंडल ने कहा कि 10 फरवरी से शुरू हो रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम &lpar;एमडीए&rpar; के दौरान सभी लाभार्थियों को फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाओं के सेवन के लिए 11 फरवरी को मेगा एम&period;डी&period;ए कैंप का आयोजन किया जाएगा जिसमे बूथ लगा कर समुदाय के सभी लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने दवा सेवन कराएंगे। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिवस तक घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा का सेवन कराया जाना सुनिश्चित करेंगे ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मीडिया कार्यशाला ने दौरान डॉ आर पी मंडल ने यह भी बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। रक्तचाप&comma; शुगर&comma; अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी हैं। सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं और अगर किसी को दवा खाने के बाद मितली आये&comma; चक्कर लगने जैसे लक्षण होते हैं तो यह शुभ संकेत है। इसका मतलब यह है कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं&comma; जो कि दवा खाने के बाद मर रहें हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान किसी लाभार्थी को दवा सेवन के पश्चात किसी प्रकार की कोई कठिनाई प्रतीत होती है तो उससे निपटने के लिए हर ब्लॉक में रैपिड रेस्पोंस टीम तैनात रहेगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में जिले के डीएम&amp&semi;ई पदाधिकारी आलोक कुमार ने मीडिया सहयोगियों से संवाद करते हुए बताया कि 10 फरवरी से शुरू होने वाले सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम कार्यक्रम में पूर्णिया जिले के कुल लाभार्थियों को कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डी&period;ई&period;सी&period;&comma; अल्बेंडाजोल और आईवरमेक्टिन की निर्धारित खुराक&comma; प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर&comma; अपने सामने खिलाई जाएगी। एमडीए कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दवाओं का वितरण बिल्कुल भी नहीं किया जायेगा। कार्यक्रम में मीडिया कर्मियों को बताया गया कि एमडीए कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों द्वारा इन दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों&comma; गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं खिलाई जाएगी। कार्यशाला में स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा मीडिया सहयोगियों से अनुरोध किया कि उनके द्वारा अपने समाचार पत्रों और चैनल के माध्यम से लोगों तक इस प्रकार सन्देश पहुंचाएं कि प्रत्येक लाभार्थी फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन स्वास्थ्यकर्मियों के सामने ही सुनिश्चित करें और इस कार्यक्रम में उनका पूर्ण सहयोग करते हुए खुद को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के ग्रसित होने से सुरक्षित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मीडिया कार्यशाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन &lpar;डब्लूएचओ&rpar; के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ दिलीप कुमार ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग&comma; सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। यह रोग संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन &lpar;डब्लूएचओ&rpar; के अनुसार फाइलेरिया&comma; दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और सामान्य स्वस्थ्य लोगों द्वारा अगर इससे बचाव न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे&colon; हाइड्रोसील &lpar;अंडकोष की थैली में सूजन&rpar;&comma; लिम्फेडेमा &lpar;शारीरिक अंगों में सूजन&rpar; और दूधिया सफेद पेशाब &lpar;काईलूरिया&rpar; से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक भेदभाव सहना पड़ता है&comma; जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर व्यक्ति लगातार 5 साल तक फाइलेरिया रोधी दवा खा लेता है तो पूरे जीवन उसे फाइलेरिया रोग होने की सम्भावना समाप्त हो जाती है और संबंधित व्यक्ति फाइलेरिया ग्रसित होने से सुरक्षित रहेंगे।<&sol;p>&NewLine;

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