पटना एम्स में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के पेट में लेप्रोस्कोपी (दूरबीन) से ऑपरेशन कर निकाला गया बड़ा ट्यूमर

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&lpar;अजीत यादव&rpar;&colon;<&sol;strong> पटना एम्स में स्त्री व प्रसूति रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर इंदिरा प्रसाद की टीम ने एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के पेट में बन रहा बड़ा ट्यूमर को 3 घंटों तक चले कठिन ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक बाहर निकालकर मरीज को नई जिंदगी प्रदान की है इस ऑपरेशन को लेप्रोस्कोपी दूरबीन से विधि द्वारा संपन्न कराया गया इतना ही नहीं इस ट्यूमर को निकालने के लिए डॉक्टरों की टीम ने लड़की की नाबालिग होने के चलते नाभी के जरिए पूरी ऑपरेशन की प्रक्रिया को पूरा किया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के पहले लड़की की पूरी जांच बिकी थी ताकि डॉक्टरों को यह पता चल सके कितना बड़ा ट्यूमर कैंसर का रूप तो नहीं ले रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-large"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;newscrime24&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2022&sol;02&sol;IMG-20220225-WA0005-840x840&period;jpg" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-29132" &sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बताया जाता है कि पटना की रहने वाली एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की पिछले 1 साल से पेट में असहनीय दर्द से परेशान थी । आर्थिक तंगहाली और काफी गरीब परिवार से आने वाली नाबालिग लड़की के बढ़ते पेट को देखकर परिवार और समाज में उसे तरह-तरह के ताने भी सुनने पड़े। लोगों को लग रहा था कि लड़की गर्भवती है। हालांकि समाज और परिवार के सभी तानो को सुनने के बावजूद लड़की ने साहस और हिम्मत का परिचय देते हुए किसी तरह पटना एम्स में पहुंची और एम्स के स्त्री व प्रसूति रोग विभाग असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर इंदिरा प्रसाद से मिली।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पटना एम्स की एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर इंद्र कुमार ने बताया कि क्योंकि लड़की नाबालिक थी और उसका पेट लगातार फुलता जा रहा था । गरीबी की वजह से लड़की की जांच वगैरह भी नहीं हो पाई थी जिससे ट्यूमर के स्वरूप का पता नहीं चल पाया। पटना एम्स में ऑपरेशन के पहले नाबालिग 17 वर्षीय लड़की की हर तरह से टेस्ट कराने के बाद लेप्रोस्कोपी विधि से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। डॉ इंदिरा प्रसाद ने बताया कि यह पूरी तरह चैलेंजिंग केस हमारे सामने आया था । उन्होंने बताया कि बिहार में यह संभवत पहली बार इतना बड़ा ट्यूमर का ऑपरेशन किस गया है। उन्होंने बताया कि करीब 3 घंटों तक चले ऑपरेशन की पूरी प्रक्रिया में दूरबीन से छेद करके नाभि के जरिए शिष्ट और ट्यूमर के निकले पानी को निकाला गया। उन्होंने बताया कि करीब 15 से 16 लीटर ट्यूमर से पानी निकाला गया है। यह ट्यूमर एक विशाल ओवेरियन सिस्ट &lpar; 36 सप्ताह के ग्रेविड गर्भाशय से बड़ा&rpar; आकार का था। लड़की पिछले एक साल से सांस लेने में तकलीफ&comma; एनोरेक्सिया और वजन कम होने के तकलीफों से परेशान थी। इसी सोमवार की ओपीडी में 17 साल की एक अविवाहित लड़की को पेट के भारी फैलाव के साथ गायनी ओपीडी में लाया गया था। जिसकी जांच करने पर&comma; पेट का सकल फैलाव पाया गया जो जलोदर की तरह अधिक दिखाई देता था क्योंकि तनावपूर्ण पेट के माध्यम से कोई गांठ नहीं निकल सकती थी।इस मरीज की पिछली कोई जांच नहीं हुई थी। डॉ इंदिरा कुमार ने बताया कि जांच उपरांत नियोप्लासिया की संभावना पर संदेह करते हुए मैंने एक अल्ट्रासाउंड किया और पेट के अंगों पर बड़े पैमाने पर प्रभाव के साथ शायद पैल्विक मूल के साथ एक बड़ा एब्डोमिनो-पेल्विक सिस्टिक घाव पाया। उन्होंने आगे बताया कि तुरंत&comma; रोगी को सीईसीटी के लिए स्थानांतरित कर दिया गया और डिम्बग्रंथि के कैंसर &lpar;सीए 125&comma; एस इनहिबिन&comma; एसएलडीएच&comma; सीए 19-9&comma; बीटा एचसीजी&comma; अल्फा फेटोप्रोटीन&rpar; के ट्यूमर मार्करों के लिए रक्त की जांच की गई। सीटी स्कैन से 37 सेमी बड़ा पता चला हालांकि&comma; जैसा कि सीटी से पता चला कि घाव में कोई ठोस घटक नहीं था&comma; घातकता की संभावित संभावना नगण्य थी। अविवाहित स्थिति और सिस्ट को ध्यान में रखते हुए मैंने इस रोगी में एक विशाल सिस्ट &lpar;36 सप्ताह के गर्भाशय से बड़े आकार का&rpar; के साथ लैप्रोस्कोपिक सिस्टेक्टोमी किया। मैंने ट्रोकार को खुली तकनीक से सीधे पुटी में रखा और15&period;5 लीटर साफ पानी वाला सिस्ट फ्लूइड निकल गया। उसके बाद गर्भनाल प्रवेशनी को फिर से स्थापित किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डॉ० इंदिरा प्रसाद ने बताया कि ऑपरेशन के बाद गुरुवार को मरीज मैं सफलतापर्वक मूत्र त्याग किया है और उसकी पूरी स्थिति पर अभी भी डॉक्टरों की नजर रखी जा रही है । इस ऑपरेशन में सीईसीटी के लिए डॉ उपासना और एनेस्थीसिया पार्ट और मेरी पूरी रेजिडेंट टीम ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।<&sol;p>&NewLine;

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