फर्जी फ्लैट मालिक मामले में कांतेश रंजन को नौकर अनिल संग कोर्ट से बड़ा झटका, बेल खारिज

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत। <&sol;strong>संपतचक के गोपालपुर थाना कांड संख्या 134&sol;25 से जुड़े बहुचर्चित फ्लैट फर्जीवाड़ा मामले में पटना व्यवहार न्यायालय की अपर सत्र न्यायाधीश-13 की अदालत ने मुख्य अभियुक्त कान्तेश रंजन उर्फ पिंकु तथा सह-अभियुक्त अनिल कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी&period; कोर्ट के फैसले के बाद मुख्य आरोपी कान्तेश रंजन फरार बताया जा रहा है और उसके घर पर ताला बंद मिला है&period; अदालत ने प्रथमदृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों&comma; दस्तावेजों और अभियोजन पक्ष की दलीलों को गंभीर मानते हुए साफ संकेत दिया कि आर्थिक अपराध और संपत्ति से जुड़े सुनियोजित फर्जीवाड़े को न्यायालय हल्के में लेने के पक्ष में नहीं है&period; इस फैसले के बाद &OpenCurlyDoubleQuote;छत्रपति शिवाजी ग्रींस” के पीड़ित परिवारों में राहत और संतोष का माहौल है&period; वर्षों की चिंता&comma; असुरक्षा और कानूनी संघर्ष के बीच अदालत के इस आदेश ने उन्हें यह भरोसा दिलाया है कि न्याय व्यवस्था अब उनकी आवाज सुन रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह मामला पटना स्थित निर्माणाधीन &OpenCurlyDoubleQuote;छत्रपति शिवाजी ग्रींस अपार्टमेंट” के ब्लॉक-ए1&comma; फ्लैट संख्या 601 से जुड़ा है&period; आरोप है कि अभियुक्तों ने स्वयं को फ्लैट का वास्तविक स्वामी बताकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और धोखाधड़ीपूर्वक संपत्ति का हस्तांतरण कर दिया&period; शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति के साथ धोखा नहीं बल्कि आम नागरिकों के विश्वास पर हमला है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जमानत सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण दस्तावेज&comma; संदिग्ध रजिस्ट्री तिथियां&comma; भूमि एवं संपत्ति अभिलेखों में विसंगतियां तथा अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास को रखा&period; अधिवक्ता सत्यप्रकाश नारायण ने अदालत को बताया कि मामला एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र का प्रतीत होता है&comma; जिसमें प्रभावशाली लोगों की कथित मिलीभगत से फर्जीवाड़े को संरक्षण देने का प्रयास किया गया&period; सुनवाई के दौरान पटना सदर की पूर्व डीसीएलआर मैत्री सिंह की कथित भूमिका का भी उल्लेख हुआ&period; अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि प्रक्रियागत अनियमितताओं का लाभ उठाकर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों को वैधता देने की कोशिश की गई&period; अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि संबंधित भूमिका जांच के दायरे में है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि केस रिकॉर्ड से प्रथमदृष्टया यह प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता का फ्लैट धोखे से बेचा गया&period; पुलिस अनुसंधान के अनुसार&comma; पिटीशनर नंबर-1 कान्तेश रंजन के विरुद्ध 9 तथा पिटीशनर नंबर-2 अनिल कुमार यादव के विरुद्ध 6 आपराधिक मामले दर्ज हैं&period; अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है&period; अदालत की यह टिप्पणी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि आर्थिक अपराध केवल पैसों का विवाद नहीं होता&comma; बल्कि यह समाज में विश्वास&comma; पारदर्शिता और कानून के शासन को चुनौती देता है&period; इसी कारण न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को अग्रिम जमानत का &OpenCurlyDoubleQuote;विशेष संरक्षण” देने से इंकार कर दिया।<&sol;p>&NewLine;

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