जश्न – ए – बचपन में झुग्गी झोपड़ी बस्तियों के बच्चों ने दिखाएं हूनर

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पटना&comma; अजीत।<&sol;mark><&sol;strong> &&num;8216&semi;जश्न-ए-बचपन&&num;8217&semi; में आज पटना के बच्चों ने अलग-अलग नाटकों की प्रस्तुति कर कालिदास रंगालय में दर्शकों को अपनी प्रतिभा से रूबरू कराया&period; झुग्गी बस्तियों के इन बच्चों ने आज पहली बार मंचीय प्रस्तुति दी जिसमें कमला नेहरू नगर&comma; चैली ताल और मंगल अखाड़ा के बच्चों ने क्रमशः तू छुपी है कहाँ &lpar;लेखक- इश्तियाक अहमद&rpar;&comma; छुट्टी का दिन &lpar;लेखक -उत्तम कुमार&rpar; और अंधेर नगरी &lpar;लेखक &&num;8211&semi; भारतेंदु हतिश्चंद्र&rpar; नाटकों में शानदार अभिनय कर दर्शकों का दिल जीत लिया&period; &&num;8216&semi;जश्न-ए-बचपन&&num;8217&semi; नामक आयोजन समर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया गया&period; इन नाटकों का निर्देशन उदय प्रताप सिंह और उत्तम कुमार ने किया और परिकल्पना भी उन्हीं की थी&period; आज के आयोजन का संचालन राहुल यादुका ने किया&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-large"><img src&equals;"https&colon;&sol;&sol;newscrime24&period;com&sol;wp-content&sol;uploads&sol;2023&sol;09&sol;IMG-20230911-WA0013-840x632&period;jpg" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-50247" &sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह आयोजन समर ट्रस्ट के सामुदायिक शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है&period; समर ट्रस्ट के सचिव सरफ़राज़ ने कहा&comma; &&num;8220&semi;थिएटर के माध्यम से झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों बच्चों को अपनी गरिमा और अस्मिता के प्रति सजग बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है&period;&&num;8221&semi; उन्होंने आगे बताया कि &&num;8216&semi;समर&&num;8217&semi; ने भी यह पाया कि बच्चे पारंपरिक तरीके से पढ़ना ज्यादा पसंद नहीं करते हैं&period; ऐसे में बच्चों को न सिर्फ पढ़ाने बल्कि उनके समग्र और सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए &&num;8216&semi;थिएटर इन एजुकेशन&&num;8217&semi; की रोचक पद्धति का इस्तेमाल किया गया&period; इसके तहत न सिर्फ बच्चों को अभिनय सिखाया गया बल्कि उन्हें पेंटिंग&comma; गीत-संगीत और कविता एवं कहानी पाठ करने संबंधी प्रशिक्षण भी दिए गए&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> इस प्रक्रिया का एक मकसद उन्हें अपनी समस्याओं को सामने लाने का तरीका सिखाना भी है ताकि वे भविष्य के कम्युनिटी लीडर बन सकें&period; इस प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उदय प्रताप सिंह ने बताया&comma; &&num;8220&semi;बच्चों को प्रशिक्षित करते हुए मैंने पाया कि वे अपने समाज के अन्य हम-उम्र बच्चों से अलग सोचने की कोशिश कर रहे हैं&period; इस तरीके से उनकी रचनाशीलता को बाहर आने का मौका मिला&period;&&num;8221&semi; वहीं उत्तम कुमार ने कहा कि शुरू में कुछ बच्चियों के पिता ने उनके नाटक सीखने पर एतराज जताया था लेकिन समय के साथ सब न सिर्फ राजी हो गए बल्कि उन्होंने हौसला भी बढ़ाया&period; उत्तम कुमार के मुताबिक कई बच्चों में अच्छे अभिनेता बनने के तमाम गुण हैं बशर्ते कि इन्हें मौका मिले और वे मेहनत करें&period;<br &sol;><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आज के आयोजन में बड़ी संख्या में झुग्गी बस्तियों के लोग शामिल हुए जो अपने बच्चों का हौसला बढ़ाने कालिदास रंगालय पहुंचे थे&period; कार्यक्रम में मशहूर रंगकर्मी परवेज अख्तर&comma; जनता दल यूनाइटेड से विधान परिषद के सदस्य और जनरल सेक्रेटरी अफाक अहमद खान&comma; समर चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष नशूर अजमल नुशी&comma; सोशल एक्टिविस्ट प्रभाकर और कला और संस्कृति से जुड़े विमलेंदु मौजूद थे l साथ ही बड़ी संख्या में पटना के रंगकर्मी&comma; नाटक प्रेमी शहरी&comma; बाल अधिकार विशेषज्ञ और अन्य जागरूक नागरिक शामिल हुए&period; कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को मेडल और प्रमाणपत्र देकर प्रोत्साहित और सम्मानित किया गया&period;<&sol;p>&NewLine;

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