जश्न – ए – बचपन में झुग्गी बस्तियों के बच्चों ने नाटक के जरिए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारी शरीफ़&comma; अजित यादव &colon;&&num;8217&semi;<&sol;strong>जश्न-ए-बचपन&&num;8217&semi; में आज पटना के बच्चों ने अलग-अलग नाटकों की प्रस्तुति कर प्रेमचंद रंगशाला में दर्शकों को अपनी प्रतिभा से रूबरू कराया&period; झुग्गी बस्तियों के इन बच्चों ने पहली बार मंचीय प्रस्तुति दी जिसमें मंगल अखाड़ा पटना सिटी और फुलवारी शरीफ़ के अल्बा अकादमी के बच्चों ने क्रमशः स्वछता की ज्योत जगी रे &lpar;लेखक- उदय प्रताप सिंह&comma; निर्देशक &&num;8211&semi; उत्तम कुमार&rpar;&comma; और नशे का सच &lpar;लेखक और निर्देशक &&num;8211&semi; उदय प्रताप सिंह&rpar; नाटकों में शानदार अभिनय कर दर्शकों का दिल जीत लिया&period; गरीब और आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर झुग्गी बस्तियों के बच्चों ने अपने कलाकारी से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया&period; &&num;8216&semi;जश्न-ए-बचपन&&num;8217&semi; का आयोजन समर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया गया&period; कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को मेडल और प्रमाणपत्र देकर प्रोत्साहित और सम्मानित किया गया&period; आयोजन का संचालन आमिर अब्बास ने किया&period;पटना डेयरी प्रोजेक्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर रूपेश राज ने बच्चों के लिए आइसक्रीम की व्यवस्था की&period; वहीं जाफरानी हाउस के फहीम खान और नीरज कुमार ने बच्चों के लिए नाश्ते का प्रबन्ध किया&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सामाजिक कार्यकर्ता नशुर अजमल नुशी ने बताया कि यह आयोजन समर ट्रस्ट के सामुदायिक शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा है&period; समर ट्रस्ट के सचिव सरफ़राज़ ने कहा&comma; &&num;8220&semi;थिएटर के माध्यम से झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों बच्चों को अपनी गरिमा और अस्मिता के प्रति सजग बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है&period;&&num;8221&semi; उन्होंने आगे बताया कि &&num;8216&semi;समर&&num;8217&semi; ने भी यह पाया कि बच्चे पारंपरिक तरीके से पढ़ना ज्यादा पसंद नहीं करते हैं&period; ऐसे में बच्चों को न सिर्फ पढ़ाने बल्कि उनके समग्र और सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए &&num;8216&semi;थिएटर इन एजुकेशन&&num;8217&semi; की रोचक पद्धति का इस्तेमाल किया गया&period; इसके तहत न सिर्फ बच्चों को अभिनय सिखाया गया बल्कि उन्हें पेंटिंग&comma; गीत-संगीत और कविता एवं कहानी पाठ करने संबंधी प्रशिक्षण भी दिए गए&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> इस प्रक्रिया का एक मकसद उन्हें अपनी समस्याओं को सामने लाने का तरीका सिखाना भी है ताकि वे भविष्य के कम्युनिटी लीडर बन सकें&period; इस प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उदय प्रताप सिंह ने बताया&comma; &&num;8220&semi;बच्चों को प्रशिक्षित करते हुए मैंने पाया कि वे अपने समाज के अन्य हम-उम्र बच्चों से अलग सोचने की कोशिश कर रहे हैं&period; इस तरीके से उनकी रचनाशीलता को बाहर आने का मौका मिला&period;&&num;8221&semi; वहीं उत्तम कुमार ने कहा कि शुरू में कुछ बच्चियों के पिता ने उनके नाटक सीखने पर एतराज जताया था लेकिन समय के साथ सब न सिर्फ राजी हो गए बल्कि उन्होंने हौसला भी बढ़ाया&period; उत्तम कुमार के मुताबिक कई बच्चों में अच्छे अभिनेता बनने के तमाम गुण हैं बशर्ते कि इन्हें मौका मिले और वे मेहनत करें&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आज के आयोजन में बड़ी संख्या में झुग्गी बस्तियों के लोग शामिल हुए जो अपने बच्चों का हौसला बढ़ाने प्रेमचंद रंगशाला पहुंचे थे&period; कार्यक्रम में मशहूर रंगकर्मी विनोद कुमार&comma; वरिष्ट रंगकर्मी जावेद अख्तर और तनवीर अख्तर &comma; समर चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष नशूर अजमल नुशी&comma; मशहूर नाटयकर्मी पुंज प्रकाश&comma; सोशल एक्टिविस्ट प्रभाकर&comma; कला और संस्कृति से जुड़े विमलेंदु मौजूद थे&period;साथ ही बड़ी संख्या में पटना के रंगकर्मी&comma; नाटक प्रेमी शहरी&comma; बाल अधिकार विशेषज्ञ और अन्य जागरूक नागरिक शामिल हुए&period;<&sol;p>&NewLine;

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