एचआईवी एड्स को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियो को दूर करना जरूरी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर।<&sol;strong> एचआईवी को लेकर लोगों में अभी भी जागरूकता की कमी है&comma; लिहाजा इसे लेकर बेहतर समझ विकसित करने के साथ-साथ एचआईवी संक्रमित मरीजों को बेहतर सामाजिक माहौल उपलब्ध कराना जरूरी है। ताकि वे भी समाज में सम्मान पूर्वक जीवन यापन कर सकें। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिये एचआईवी एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत संचालित मुख्यधारा कार्यक्रम के तहत सामाजिक सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन शनिवार को जिला स्वास्थ्य समिति सभागार में आयोजित किया गया। सिविल सर्जन विधानचंद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सीडीओ डॉ वाईपी सिंह&comma; डीआईओ डॉ मोईज&comma; डीएमएनई पंकज कुमार&comma; डीसीएम सौरव कुमार सहित संबंधित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संक्रमितों को लेकर सामाजिक नजरिया में बदलाव जरूरी<br>जिला एड्स नियंत्रण व बचाव इकाई के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन विधानचंद्र सिंह ने कहा कि एचआईवी एड्स को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है। लोगों को इस बीमारी से बचाव संबंधी उपायों की जानकारी देते हुए कारगर रणनीति के तहत इस बीमारी को लेकर समाज में स्वस्थ वातावरण के निर्माण को लेकर कारगर पहल की जरूरत है। सीडीओ डॉ वाईपी सिंह ने कहा कि जागरूकता ही एचआईवी संक्रमण से बचाव का एक मात्र जरिया है। लिहाजा हर स्तर पर इसे लेकर जरूरी प्रयास करने की जरूरत है।डीआईओ डॉ मोईज ने कहा कि एचआईवी को लेकर सामाजिक नजरिया में बदलाव लाना जरूरी है। बीमारी को लेकर लोगों में बेहतर समझ विकसित करने की जरूरत है। जो रोग नियंत्रण के साथ संक्रमित व्यक्ति को समाज में सम्मानपूर्ण जीवन जीने का अधिकार उपलब्ध कराने के लिहाज से जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सामूहिक प्रयास व जन जागरूकता से बीमारी पर नियंत्रण संभव<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला में डीपीएम एड्स अखिलेश कुमार द्वारा पीपीटी के माध्यम से एचआईवी के संचार व रोकथाम संबंधी उपायों पर विस्तृत चर्चा की गयी। उन्होंने कहा कि एचआईवी महज स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि दूसरे अन्य विभागों से जुड़ा हुआ मामला भी है। सामूहिक प्रयास व व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से ही संक्रमितों को समाज के मुख्यधारा में लाया जा सकता है। एचआईवी सामाजिक&comma; आर्थिक&comma; शारीरिक&comma; मनौवैज्ञानिक व चिकित्सकीय पहलूओं से जुड़ा है। इसलिये संबंधित सभी विभागों को साथ आना जरूरी है। उन्होंने बताया कि एचआईवी संक्रमितों से किसी तरह का भेदभाव अपराध की श्रेणी में आता है। इसमें आर्थिक जुर्माना के साथ-साथ सजा का प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम की सफलता में एफएलडब्ल्यू एचएलपीपीटी रिजवान सहित अन्य का योगदान सराहनीय रहा।<&sol;p>&NewLine;

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