बिहार में मिथकों पर भारी पड़ा संवाद, लाखों बेटियों तक पहुंचा एचपीवी सुरक्षा कवच

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>बिहार में सर्वाइकल &lpar;कोख&rpar; कैंसर से बचाव के लिए चल रहा एचपीवी टीकाकरण अभियान भ्रांतियों को पीछे छोड़ जन आंदोलन बन चुका है। आशा कार्यकर्ताओं &lpar;जैसे पुनपुन प्रखंड की मधु देवी&rpar; और एएनएम के घर-घर संवाद की बदौलत बिहार ने 13 लाख 62 हजार किशोरियों के लक्ष्य में से 86 प्रतिशत &lpar;11&comma;50&comma;701 किशोरियां&rpar; को सुरक्षित कर देश में चौथा स्थान हासिल किया है। यह संख्या शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने वाले गुजरात और मध्य प्रदेश की कुल लक्षित आबादी से भी दोगुनी है।<br>बिहार में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारक है&comma; जहाँ संक्रमण दर 14&period;1 प्रति लाख और मृत्यु दर 7&period;1 प्रति लाख है। पटना एम्स की डॉ&period; इंदिरा प्रसाद के अनुसार&comma; टीकाकरण व स्क्रीनिंग ही सबसे प्रभावी रणनीति है। पटना के एक क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल में 96 नमूनों की जांच में 77&percnt; मामलों में एचपीवी-16 और 17&percnt; में एचपीवी-18 वेरिएंट मिले थे।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>शुरुआत में अभियान के सामने प्रजनन क्षमता और दुष्प्रभावों से जुड़ी अफवाहें बड़ी चुनौती थीं। जनवरी 2025 में &&num;8216&semi;नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन&&num;8217&semi; द्वारा पटना के 801 छात्रों पर किए गए शोध से पता चला कि चिकित्सा पृष्ठभूमि के 84&percnt; के मुकाबले गैर-चिकित्सा क्षेत्र के केवल 16&percnt; छात्रों को ही एचपीवी की जानकारी थी।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस भ्रम को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया। अभियान की सफलता सुनिश्चित करने में कार्यपालक निदेशक&comma; राज्य स्वास्थ्य समिति&comma; बिहार के कुशल मार्गदर्शन और अनुश्रवण की अहम भूमिका रही। कटिहार&comma; औरंगाबाद&comma; अरवल&comma; सारण&comma; गोपालगंज&comma; वैशाली के जिला पदाधिकारी के मेहनत ने अभियान की सफलता सुनिश्चित की। अभियान के दौरान पंपलेट&comma; पोस्टर्स&comma; कूड़ा संग्रहण गाड़ियों और डॉ&period; मंजू गीता मिश्रा व डॉ&period; शांति राय जैसे विशेषज्ञों के वीडियो संदेशों के जरिए शंकाओं का समाधान किया गया। दो चरणों की विस्तृत माइक्रो-प्लानिंग के कारण यह अभियान सफल रहा है। अब शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए इसकी अवधि तीन महीने और बढ़ाई गई है।<&sol;p>&NewLine;

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