समाज में व्याप्त, अशिक्षा, कुपोषण, हत्या और बलात्कार, सवाल पूछती महिला क्यों न होता इसका सुधार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारी शरीफ़&comma; अजीत।<&sol;strong> गुरुवार को मंथन सामाजिक संस्थान ने महिला दिवस के अवसर पर &&num;8220&semi;सशक्त नारी&comma; भारत की शान&&num;8221&semi; कार्यक्रम में समाज में व्याप्त&comma; अशिक्षा&comma; कुपोषण&comma; हत्या और बलात्कार बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए महिलाओ को जागरूक करने का काम किया&period; कार्यक्रम का उद्घाटन दूर दूर से आई महिलाओं संस्थान के निदेशक डा० फा० टी निशांत ने दीप प्रज्जवलित कर किया&period; इस कार्यक्रम में करीब 800 की संख्या में महिलाएँ मंथन कार्य क्षेत्र के दूरस्त गाँवों से आकर भाग ली&period; महिलाओं ने अपनी ओर से नाटक&comma; गीत&comma; अपनी विचार-अनुभव&comma; भाषण तथा रंगारंग नुत्य कार्यक्रमों को पेश कर कार्यक्रम में चार चाँद लगाा दी&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><code> इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ&period; बिन्दा सिंह मनोचिकित्सक&comma; विशिष्ट अतिथि वकील अल्का वर्मा&comma; मंथन संस्थान की उप निदेशिका सिस्टर ग्रेसी&comma; केथोलिक चर्च प्रीस्ट फादर अलबर्ट तिर्की&comma; सिस्टर्स&comma; ब्रदर साथ ही संस्थान के सभी कार्यकर्तागण मौजूद थे&period;कार्यक्रम का संचालन स्मिता और अनुष्का जी द्वारा किया गया&period;<&sol;code><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फादर डॉ&period; टी निशांत ने कहा कि मंथन आजादी के इतने वर्षों बाद भी दलित समाज खासकर मुसहर समाज के लोंगों में आज भी विपन्नता&comma; अशिक्षा&comma; बेरोजगारी यानि काम का अभाव&comma; अत्याचार&comma; अत्पीड़न&comma; देखने को मिल रहा है&period;महिलाएँ हर क्षेत्र में अपना नाम रौशन कर रही हैं चाहे वह खेल का मैदान&comma; शिक्षा क्षेत्र की बात हो&comma; राजनीति क्षेत्र की बात हो&comma; नौकरी&comma; रोजगार&comma; उद्योग धंधा क्षेत्र की बात हो इन सभी क्षेत्रों में चहुँमुखी विकास हुआ है&period; दुसरी ओर एक तबका ऐसा भी है जहाँ महिलाओं में बच्चों बच्चियों में भूख-भूखमरी&comma; कुपोषण&comma; लाचारी&comma; विवशता का आलम दिखाई दे रहा है&period;ये महिलाएँ चाह कर भी कुछ कर पाने में अक्षम बनी हुई है&period; इनके प्रति सभ्य समाज&comma; सरकार और शासन-प्रशासन की नजरियाँ द्वोयम दर्जे वाली दिखाई दे रही है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विशिष्ट अतिथि अल्का वर्मा ने कहा कि महिलाओं को सशक्त होना बहुत जरूरी है&period; हम महिलाएँ सशक्त होंगे तभी हमारा देश सशक्त होगा&comma; सबल देश की श्रेणी में अंतर्राष्ट्रीय पटल पर दिखेगा&period; ऐसा कार्यक्रम का आयोजन सदा होते रहना चाहिए इससे महिलाओं में सशक्तिकरण को बल मिलता है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अंत में इस कार्यक्रम की संयोजिका सि&period; ग्रेसी के द्वारा उपस्थित जन समूहों को धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया&period;<&sol;p>&NewLine;

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