बर्फीली हवाओं ने बिहार को जकड़ा : 15 जिलों में तापमान 6 डिग्री से नीचे गयाजी सबसे ठंडा, पारा 4.5 डिग्री तक फिसला

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> बिहार में ठंड ने इस बार अपना सबसे कठोर रूप दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी के कारण बर्फीली पछुआ हवाएं मैदानी इलाकों तक पहुंच रही हैं। इन हवाओं ने प्रदेश में ठिठुरन बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि दिन में निकलने वाली धूप भी ठंड से राहत नहीं दे पा रही और रातें और ज्यादा कंपकंपा देने वाली हो गई हैं।आठवीं कक्षा तक के सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 15 जिलों में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। गयाजी प्रदेश का सबसे ठंडा जिला बना हुआ है&comma; जहां न्यूनतम तापमान 4&period;5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भागलपुर के सबौर में पारा 5&period;0 डिग्री तक पहुंच गया है। शेखपुरा&comma; छपरा&comma; किशनगंज और भागलपुर सहित कई जिलों में शीतलहर का असर बना हुआ है। राजधानी पटना समेत 36 जिलों में कोल्ड डे की स्थिति दर्ज की गई है&comma; जबकि दरभंगा और बक्सर में हालात और ज्यादा गंभीर रहे।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ठंड के साथ-साथ घने कोहरे ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सुबह के समय अधिकांश जिलों में 10 बजे तक दृश्यता बेहद कम रही। कई इलाकों में सड़कें धुंध में ढकी रहीं। पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर में दृश्यता घटकर 40 मीटर तक पहुंच गई। कोहरे के कारण यातायात प्रभावित रहा और वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।राजधानी पटना सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में गुरुवार की रात 7 बजे के बाद से घने कोहरे ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते कोहरा इतना घना हो गया कि शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक दृश्यता बेहद कम हो गई। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रात भर कोहरे की चादर जमी रही&comma; जिससे सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया। कोहरे के कारण राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई। कई जगहों पर वाहन रेंगते नजर आए&comma; जबकि ग्रामीण इलाकों में आवागमन लगभग प्रभावित रहा। बसों&comma; ट्रकों और निजी वाहनों को हेडलाइट और फॉग लाइट के सहारे चलना पड़ा। रेलवे और सड़क यातायात पर भी कोहरे का असर देखा गया। शुक्रवार की सुबह भी हालात में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। सुबह 8 बजे के बाद कोहरे में हल्की कमी जरूर आई&comma; लेकिन धूप नहीं निकल सकी। आसमान में बादलों और धुंध की मौजूदगी बनी रही&comma; जिससे ठंड का असर और ज्यादा महसूस किया गया। बर्फीली पछुआ हवाओं के चलते लोग ठिठुरते नजर आए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कोहरे के साथ बढ़ी ठंड ने आम जनजीवन को प्रभावित किया। सुबह के समय लोग घरों से निकलने में हिचकते दिखे। स्कूल जाने वाले बच्चों&comma; दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और मजदूरों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी। बाजारों में भी देर से चहल-पहल शुरू हुई। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में सुबह और रात के समय कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। लोगों को सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कड़ाके की ठंड अब जानलेवा साबित होने लगी है। भागलपुर के मोजाहिदपुर थाना क्षेत्र स्थित गुरहट्टा चौक पर शुक्रवार सुबह एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि उसकी मौत ठंड लगने से हुई है। यह घटना ठंड के बढ़ते खतरे को उजागर करती है&comma; खासकर गरीब और बेघर लोगों के लिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बच्चों पर ठंड का सबसे गहरा असर<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>इस भीषण ठंड का सबसे अधिक असर बच्चों पर देखा जा रहा है। राजधानी पटना में बीते सात दिनों के भीतर एक हजार से अधिक बच्चे विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे हैं। इनमें से करीब 400 बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें भर्ती करना पड़ा। इलाज के दौरान पीएमसीएच में दो और आईजीआईएमएस में एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों के अनुसार 6 महीने से 15 वर्ष तक के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पटना एम्स के पेडियाट्रिक चाइल्ड डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ&period; चंद्र मोहन कुमार ने बताया कि अस्पताल का पेडियाट्रिक वार्ड पूरी तरह भरा हुआ है और सभी 90 बेड फिलहाल फुल हैं। उन्होंने बताया कि 6 माह से 12 माह तक के बच्चे सबसे ज्यादा बीमार होकर आ रहे हैं। इनमें सांस लेने में दिक्कत&comma; सर्दी-खांसी और निमोनिया जैसे लक्षण प्रमुख हैं। प्रतिदिन लगभग 150 बच्चे इलाज के लिए एम्स पहुंच रहे हैं और इसकी मुख्य वजह ठंड है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>चिकित्सकों के मुताबिक ठंड के मौसम में बच्चों को घर के अंदर सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है। साफ-सफाई&comma; पर्याप्त गर्म कपड़े और मौसम के अनुसार खानपान से बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। लक्षण दिखते ही इलाज में देरी करना खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब 20 प्रतिशत बच्चे कोल्ड डायरिया की चपेट में हैं&comma; जबकि निमोनिया के मामलों में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। उल्टी-दस्त&comma; तेज बुखार&comma; बलगम वाली खांसी&comma; ठंड लगना और सांस फूलना इसके प्रमुख लक्षण बताए गए हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>स्कूल बंद&comma; प्रशासन अलर्ट-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बढ़ती ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। पटना और नालंदा में आठवीं कक्षा तक के सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं। वैशाली में दसवीं कक्षा तक के स्कूल 11 जनवरी तक बंद रहेंगे। बेगूसराय&comma; मुंगेर&comma; सुपौल&comma; भोजपुर और भागलपुर में आठवीं कक्षा तक के स्कूल 10 जनवरी तक बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं बांका में 12 जनवरी और बक्सर में 13 जनवरी तक स्कूल बंद रखने का आदेश दिया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले सात दिनों तक प्रदेश का मौसम शुष्क बना रहेगा और कई जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाया रहने की संभावना है। तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव हो सकता है&comma; लेकिन फिलहाल ठंड से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।<br &sol;>कुल मिलाकर&comma; बिहार इस समय भीषण ठंड के दौर से गुजर रहा है। गिरता तापमान&comma; घना कोहरा और बढ़ती बीमारियां प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।<&sol;p>&NewLine;

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