युवा व किशोरों को तेजी से अपना शिकार बना रहा है हाईपरटेंशन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> हाई ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ता हुआ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। जो आगे चलकर हृदय रोग का कारण बन सकता है। जानकारों की मानें तो पहले ब्लड प्रेशर उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी के तौर पर जाना जाता था। जो अब हर उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाने लगा है। हाल के वर्षों में देखा जाये तो हाई ब्लड प्रेशर किशोर व युवा आयु वर्ग के लोगों को आसानी से अपना शिकार बनाने लगा है। एक अनुमान के मुताबिक देश में हर चार में से एक व्यक्ति ब्लड प्रेशर का शिकार हैं। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग हाइपरटेंशन के प्रति आम लोगों को जागरूक करने&comma; स्वास्थ्य संस्थानों में इसके इलाज व दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के प्रयास में जुटा है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>विभिन्न स्तरों पर होंगे जागरूकता संबंधी कार्यक्रम &&num;8211&semi;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि रक्तचाप के कारण व इसे नियंत्रण संबंधी उपायों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से समय-समय पर विभाग द्वारा जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से समुदाय को इसके खतरों के प्रति सजग किया जा रहा है। अमूमन जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में बीपी मरीजों की जांच&comma; इलाज व जरूरी परामर्श संबंधी सेवा संचालित है। लोगों को नियमित अंतराल पर अपने बीपी की जांच कराते रहना चाहिये। जो बीपी को नियंत्रित रखने के लिहाज से भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित जीवनशैली को अपना कर हाइपरटेंशन के खतरों को बहुत हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>महिलाएं भी हो रहीं हैं बीपी का तेजी से शिकार &&num;8211&semi;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>एनएफएचएस के आंकड़ों के मुताबिक जिले के 15 साल या इससे अधिक उम्र की 05 पांच फीसदी महिलाएं बीपी की सामान्य समस्या से ग्रसित हैं। वहीं 2&period;9 फीसदी महिलाएं मध्यम व 12&period;1 फीसदी महिलाएं गंभीर रूप से बीपी की समस्या की शिकार हैं। वहीं इसी उम्र के पुरुषों में 8&period;9 फीसदी पुरुष सामान्य बीपी&comma; 3&period;1 फीसदी मध्यम व 15&period;8 फीसदी गंभीर रूप से बीपी के शिकार हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>लक्षण दिखें तो करा लें बीपी की माप-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सर दर्द&comma; सांस का फूलना&comma; थकान या भ्रम&comma; छाती में दर्द&comma; पसीना आना&comma; धुंधला नजर आना&comma; उल्टी आना हाइपरटेंशन के सामान्य लक्षण हैं। इस तरह का कोई लक्षण दिखने पर तत्काल बीपी की जांच जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>ये हैं हाईपरटेंशन के कारण-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>एसीएमओ डॉ राजेश कुमार ने बताया कि हाईपरटेंशन का मुख्य कारण तनाव व अनियंत्रित खानपान होता है। इसके अलावा मोटापा&comma; नींद की कमी&comma; तैलीय पदार्थों का अधिक सेवन व नमक का अधिक सेवन भी इसके कुछ अन्य कारणों में से एक है। इसलिए यह जरूरी है कि अपनी डाइट पर खास तौर पर ध्यान रखा जाये। हाईपरटेंशन से बचाव के लिए फल&comma; सब्जियां व अंकुरित अनाज का सेवन महत्वपूर्ण है। नियमित रूप से व्यायाम करने से काफी लाभ होता है। इसके साथ शरीर के वजन व बीपी को नियंत्रित रखना और इसकी नियमित जांच भी जरूरी होती है।<&sol;p>&NewLine;

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