उच्च रक्तचाप दिवस : सभी अस्पतालों में मनाया जा रहा उच्च रक्तचाप दिवस

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24<&sol;strong>&rpar; हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप &lpar;हाई ब्लड प्रेशर&rpar; जैसी बीमारी से बचाव एवं सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर साल 17 मई को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपस्थित लोगों की जांच करते हुए उन्हें उच्च रक्तचाप से सुरक्षित रहने के लिए चिकित्सकीय जानकारी दी जाती है। शनिवार को भी जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में उच्च रक्तचाप दिवस के रूप में मनाया गया। ज्यादा से ज्यादा लोगों को उच्च रक्तचाप के लिए जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा 17 मई से 23 मई तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क जांच सह चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया जाएगा और उपस्थित लोगों की जांच करते हुए उन्हें चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जाएगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>साइलेंट किलर के रूप में काम करता है उच्च रक्तचाप&comma; लोगों को नियमित जांच की जरूरत &colon; सीएस<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप धीरे-धीरे नजर आने वाला रोग है जिसकी जानकारी आम लोगों को कुछ समय के बाद मिलती है। सबसे अहम बात यह है कि वर्तमान समय में खराब जीवन शैली के कारण होने वाले उच्च रक्तचाप से 30 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र में व्यक्ति सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कभी-कभी परिवार के अन्य सदस्यों के उच्च रक्तचाप के शिकार होने पर आनुवांशिक रूप से उनके बच्चे भी इसके शिकार हो जाते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> इससे सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को 30 वर्ष की उम्र के बाद साल में एक बार अपनी स्वास्थ्य जांच आवश्य करवानी चाहिए। जांच के बाद अगर किसी का रक्तचाप ज्यादा है तो इसका इलाज कराना चाहिए क्योंकि 80 से 85 प्रतिशत लोगों में उच्च रक्तचाप का कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है। कभी-कभी कुछ लोगों को उच्च रक्तचाप की बीमारी जीवन के अंतिम समय में हृदयघात&comma; लकवा&comma; किडनी फेल के रूप में अटैक करता है और इससे लोगों की तत्काल मृत्यु भी हो जाती है। इसीलिए इस बीमारी को &&num;8216&semi;साइलेंट किलर&&num;8217&semi; भी कहा जाता है। इससे सुरक्षित रहने के लिए 30 वर्ष की आयुसीमा के बाद सभी लोगों को साल में एक बार अपनी चिकित्सकीय जांच जरूर करवानी चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>01 लाख 10 हजार से अधिक उच्च रक्तचाप से ग्रसित मरीजों का एनसीडी क्लीनिक से हो रहा उपचार &colon; एनसीडीओ<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी &lpar;एनसीडीओ&rpar; डॉ सुभाष कुमार सिंह ने बताया कि जिले में वर्ष 2025-26 में जिले के सभी अस्पताल में संचालित एनसीडी क्लीनिक में 01 लाख 10 हजार 384 लोगों गैर संचारी रोगों से ग्रसित बीमारियों की स्क्रीनिंग की गई है। इसमें से 17 हजार 487 लोग उच्च रक्तचाप से और 15 हजार 407 लोग डाइबिटीज से ग्रसित पाए गए हैं। सभी उच्च रक्तचाप के ग्रसित मरीजों का एनसीडी क्लीनिक से नियमित जांच करते हुए चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जा रही है। जिले में जीएमसीएच के ओपीडी के अलावा जिले के एडीएच&comma; रेफरल अस्पताल&comma; सीएचसी&comma; पीएचसी&comma; एपीएचसी&comma; यूपीएचसी एवं एचडब्ल्यूसी पर चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क रूप से बीपी&comma; मधुमेह एवं कैंसर को लेकर उचित परामर्श दिया जाता है। एनसीडीओ ने बताया कि अधिक वजन या मोटापा&comma; शराब&sol;तम्बाकू का अत्यधिक सेवन&comma; गुर्दा की बीमारी&comma; अत्यधिक तनाव&comma; अत्यधिक नमक का सेवन आदि लोगों के उच्च रक्तचाप से ग्रसित होने का कारण होता है। ऐसी स्थिति वाले लोगों को सुरक्षित रहने के लिए अपने नजदीकी अस्पताल में नियमित चिकित्सकीय जांच करवाते हुए स्वास्थ्य सहायता का लाभ लेना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अनिवार्य रूप से रक्तचाप की नियमित तौर पर जांच करानी चाहिए &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीपीएम सोरेंद्र कुमार दास ने कहा कि उच्च रक्तचाप के शिकार लोगों को बचाव के लिए खुद का ध्यान रखना जरूरी होता है। इसके लिए सभी लोगों को अपना वजन नियंत्रित रखना&comma; शारीरिक गतिविधियों में वृद्धि&comma; संतुलित आहार&comma; ताज़ा फल एवं हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन&comma; रक्तचाप की नियमित जांच&comma; चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आवश्यक दवाओं का सेवन&comma; शराब या तंबाकू का सेवन वर्जित करना&comma; तनाव से दूर रहना&comma; तेल&comma; घी&comma; अत्यधिक नमक का सेवन कम करना आदि का विशेष रूप से ध्यान रखना पड़ेगा।<&sol;p>&NewLine;

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