‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत जिलाधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक आयोजित, पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; à¤œà¤¯à¤¾ कुमारी &colon;<&sol;strong> कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से &OpenCurlyQuote;ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत राज्य में पांडुलिपियों के संरक्षण&comma; सर्वेक्षण एवं डिजिटलीकरण से संबंधित कार्यों की समीक्षा के लिए गुरुवार को उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों के साथ आयोजित की गई।बैठक में राज्यभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वेक्षण&comma; दस्तावेजीकरण एवं डिजिटलीकरण कार्य को मिशन मोड में तेज गति से पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए तथा विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाए।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि भारत सरकार द्वारा देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा एवं बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए वर्ष 2025–26 के बजट में &OpenCurlyQuote;ज्ञान भारतम् मिशन’ की घोषणा की गई है। इस मिशन का उद्देश्य भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत का सर्वेक्षण&comma; डिजिटलीकरण एवं संरक्षण करना है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की कवायद<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>&OpenCurlyQuote;ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत राज्य के विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों&comma; मठों&comma; मंदिरों&comma; शैक्षणिक संस्थानों&comma; निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध कागज&comma; भोजपत्र&comma; ताड़पत्र&comma; कपड़े आदि पर लिखित पांडुलिपियों की पहचान&comma; सर्वेक्षण&comma; कैटलॉगिंग&comma; संरक्षण एवं डिजिटलीकरण का कार्य किया जा रहा है। बैठक में यह भी बताया गया कि पांडुलिपियों का तात्पर्य कागज&comma; भोजपत्र&comma; ताड़पत्र&comma; कपड़ा&comma; धातु आदि पर हस्तलिखित ऐसे ग्रंथों से है&comma; जो न्यूनतम 75 वर्ष प्राचीन हों।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समीक्षा के क्रम में यह अवगत कराया गया कि बिहार में बड़ी संख्या में पांडुलिपियों की पहचान एवं सर्वेक्षण का कार्य प्रगति पर है। इसे और गति देने के लिए जिला स्तर पर समितियों के गठन&comma; सर्वेयरों की नियुक्ति एवं विभिन्न संस्थानों के सहयोग से कार्य किया जा रहा है।मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालयों&comma; संग्रहालयों&comma; पुस्तकालयों&comma; मठों&comma; मंदिरों एवं निजी संग्रहकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर इस कार्य को व्यापक स्तर पर संचालित किया जाए। साथ ही &OpenCurlyQuote;ज्ञान भारतम् मिशन’ के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार करने पर भी बल दिया गया।इस अवसर पर कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार तथा कृष्ण कुमार निदेशक&comma; संग्रहालय निदेशालय सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;

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