कैंसर के इलाज में जीन जांच की बढ़ी ताकत, महावीर कैंसर संस्थान में विशेषज्ञों ने बताई नई तकनीकों की अहमियत

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> महावीर कैंसर संस्थान में आयोजित सैंगर सिक्वेसिंग की क्लिनिकल उपयोगिता विषयक सीएमई में देश के कैंसर विशेषज्ञों ने आधुनिक जीन आधारित जांच और उपचार तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की&period; विशेषज्ञों ने कहा कि कैंसर के इलाज का भविष्य अब पारंपरिक जांच से आगे बढ़कर आणविक और जेनेटिक विश्लेषण पर आधारित हो रहा है&comma; जिससे मरीजों को अधिक सटीक और व्यक्तिगत उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बुद्धा कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ&period; अरविंद कुमार ने कहा कि नेक्स्ट जेनरेशन सिक्वेसिंग &lpar;एनजीएस&rpar; कैंसर उपचार के क्षेत्र में नई क्रांति लेकर आई है&period; इस तकनीक से ट्यूमर के डीएनए और आरएनए स्तर पर होने वाले म्यूटेशन की पहचान कर मरीज के अनुरूप उपचार तय किया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डाटार कैंसर जेनेटिक्स के उपाध्यक्ष डॉ&period; सिलमब्रासन मास्कोमानी ने बताया कि सेल डीएक्स तकनीक केवल डीएनए ही नहीं&comma; बल्कि आरएनए का भी विश्लेषण करती है&period; इससे कैंसर की प्रकृति और उसके व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने में सहायता मिलती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इंटीग्रेटेड ऑन्को पैथोलॉजी&comma; मुंबई के प्रमुख डॉ&period; कुणाल शर्मा ने कहा कि मॉर्फोलॉजी आधारित जांच से लेकर आणविक परीक्षण तक की यात्रा ने चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा दी है&period; आधुनिक तकनीकों के कारण रोगों की सटीक पहचान&comma; उपचार की योजना और रोकथाम पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो गई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वैज्ञानिक सत्र में नारायणा कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ&period; अभिषेक कुमार तथा थर्मो फिशर साइंटिफिक के वैज्ञानिक डॉ&period; अनिल कुमार ने भी कैंसर निदान में नई तकनीकों और अनुसंधान की भूमिका पर अपने विचार रखे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में संस्थान की एसोसिएट निदेशक एवं रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ&period; विनीता त्रिवेदी&comma; डॉ&period; सी&period; खंडेलवाल&comma; डॉ&period; सुबोध कुमार सिन्हा&comma; डॉ&period; पी&period;के&period; वर्मा&comma; डॉ&period; रीता रानी&comma; डॉ&period; ऋचा चौहान&comma; डॉ&period; मुकुल मिश्रा&comma; डॉ&period; अंजलि&comma; डॉ&period; रविश्वर नारायण&comma; डॉ&period; उषा सिंह&comma; डॉ&period; राहुल जनक सिन्हा&comma; डॉ&period; एम&period; साहिन&comma; डॉ&period; राकेश मेहरा&comma; डॉ&period; टी&period; रहमान&comma; डॉ&period; विनय और डॉ&period; श्रुति खेमका सहित बड़ी संख्या में चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वैज्ञानिक सत्र का संचालन रिसर्च विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ&period; अरुण कुमार ने किया&period; कार्यक्रम में डॉ&period; राजीव&comma; डॉ&period; अभिनव और डॉ&period; स्नेहा नवीन सहित अन्य चिकित्सकों की भी सक्रिय भागीदारी रही&period; अंत में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ&period; मोहम्मद अली ने धन्यवाद ज्ञापन किया।<&sol;p>&NewLine;

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