डेयरी प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन पर चार दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, 10 जिलों के किसानों ने लिया प्रशिक्षण

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; अजित।<&sol;strong> बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय&comma; पटना के प्रसार शिक्षा निदेशालय और बामेती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित डेयरी प्रसंस्करण&comma; दूध एवं दुग्ध उत्पादों में वैल्यू एडिशन विषय पर आधारित चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन विश्वविद्यालय परिसर में किया गया&period; इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार के 10 जिलों से आत्मा से जुड़े 40 किसान&comma; एटीएम और बीटीएम ने भाग लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समापन समारोह में शिक्षा विभाग&comma; बिहार सरकार के एडवाइजर बैद्यनाथ यादव मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे&period; उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान दी गई वैज्ञानिक जानकारियां किसानों और पशुपालकों के लिए उपयोगी हैं और इनके व्यावहारिक उपयोग से आय में वृद्धि संभव है&period; उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि वे यहां अर्जित ज्ञान को गांव-गांव तक पहुंचाएं&comma; ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विश्वविद्यालय के निदेशक&comma; प्रसार शिक्षा डॉ&period; निर्मल सिंह दहिया ने कहा कि वर्तमान समय में समेकित कृषि प्रणाली को अपनाना आवश्यक है&comma; जिसमें कृषि&comma; पशुपालन और हॉर्टिकल्चर को एक साथ जोड़ा जाए&period; उन्होंने बताया कि इससे किसानों को वर्षभर आय के अवसर मिलते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय के डेयरी फार्म का भ्रमण कराया गया&comma; जहां उन्नत नस्लों&comma; स्वच्छ दुग्ध उत्पादन&comma; चारा प्रबंधन&comma; पशु आहार और पशुओं की देखभाल से जुड़ी जानकारी दी गई&period; इसके अलावा प्रतिभागियों ने पटना डेयरी प्रोजेक्ट का भी भ्रमण किया और बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय के एलपीटी विभाग में दुग्ध से विभिन्न उत्पाद तैयार करने और उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में बामेती के उप-निदेशक रंजीत पाण्डेय&comma; डॉ&period; योगेन्द्र सिंह जादौन&comma; डॉ&period; रविकांत निराला&comma; डॉ&period; सरोज कुमार रजक&comma; डॉ&period; पुष्पेन्द्र&comma; डॉ&period; गार्गी सहित अन्य वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;

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