कॉफ्फेड में मछुआरा दिवस समारोह भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ &lpar;कॉफ्फेड&rpar; द्वारा मछुआरा दिवस समारोह का आयोजन आज कॉफ्फेड सभागार&comma; द्वितीय तल&comma; मीन भवन&comma; पश्चिमी बोरिंग कैनाल रोड&comma; पटना में अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों&comma; मछुआरा समाज के गणमान्य लोगों&comma; सामाजिक कार्यकर्ताओं&comma; विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत के मत्स्य क्षेत्र के अग्रणी वैज्ञानिक एवं &&num;8220&semi;नीली क्रांति के जनक&&num;8221&semi; पद्मश्री डॉ&period; हीरालाल चौधरी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर कॉफ्फेड के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने कहा कि 10 जुलाई को &OpenCurlyQuote;मछुआरा दिवस’ भारतवर्ष में मनाया जाता है। यह भारत के वैज्ञानिक स्व० हीरालाल चौध्री &lpar;1921-2014&rpar; की देन है। उनके द्वारा मत्स्य अनुसंधान की दिशा में कदम बढ़ाते हुये उन्होंने रेवा मछली का मत्स्य प्रेरित प्रजनन पहली बार एक्वेरियम में 10 जुलाई 1957 को कराया था। उन्होने भारतीय मत्स्य पालन के विकास में जो ऐतिहासिक योगदान दिया है&comma; वह देश के मत्स्य क्षेत्र के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उनके अनुसंधान&comma; दूरदर्शी सोच एवं वैज्ञानिक कार्यों के कारण भारत में मत्स्य उत्पादन को नई दिशा मिली तथा लाखों मत्स्य पालकों और मछुआरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए आधुनिक&comma; वैज्ञानिक एवं सहकारिता आधारित मत्स्य विकास को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उद्घाटन के उपरांत आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऋषिकेश कश्यप ने कहा कि बिहार के गरीब मछुआरे आज प्राकृतिक आपदाओं&comma; सूखे एवं सरकारी नीतियों के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इस वर्ष अल्प वर्षा के कारण अधिकांश तालाब सूख रहे हैं&comma; जिससे मत्स्य उत्पादन प्रभावित हुआ है और हजारों मछुआरा परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है। ऐसी स्थिति में सरकार को राहत एवं पुनर्वास की योजनाएँ लागू करनी चाहिए&comma; किन्तु इसके विपरीत विभाग द्वारा ऐसे प्रस्ताव लाए जा रहे हैं जो मछुआरों के हितों के प्रतिकूल हैं।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वयं को मछुआरों की हितैषी बताती है&comma; लेकिन मत्स्य विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर नई मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के गठन का प्रस्ताव लाकर गरीब मछुआरों को आपस में बाँटने एवं विवाद की स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में प्रखंड स्तर पर गठित सहकारी समितियाँ पहले से कार्य कर रही हैं&comma; फिर पंचायत स्तर पर नई समितियों के गठन का कोई औचित्य नहीं है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>श्री कश्यप ने कहा कि राज्य के अनेक पंचायतों में न तो सरकारी तालाब उपलब्ध हैं और न ही पर्याप्त संख्या में परंपरागत मछुआरे हैं। दूसरी ओर मत्स्य विभाग द्वारा लगातार सरकारी तालाबों&comma; नदियों एवं बड़े जलाशयों की बंदोबस्ती खुली डाक &lpar;नीलामी&rpar; के माध्यम से की जा रही है&comma; जिससे गरीब मछुआरा समाज अपने पारंपरिक अधिकारों से वंचित हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में सरकारी जलाशयों की बंदोबस्ती सहकारी समितियों को प्राथमिकता के आधार पर की जाती थी&comma; जिससे हजारों परिवारों की आजीविका सुरक्षित रहती थी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली के कारण सहकारिता आंदोलन कमजोर हो रहा है तथा गरीब मछुआरों के हितों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने मांग की कि ऐसे अधिकारियों की निष्पक्ष जांच निगरानी विभाग से कराई जाए और दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रबंध निदेशक ने कहा कि कॉफ्फेड लंबे समय से राज्य सरकार के समक्ष गरीब मछुआरों के लिए सरल ऋण व्यवस्था&comma; अनुदान&comma; आधुनिक मत्स्य पालन तकनीक&comma; मत्स्य बीज&comma; विपणन सुविधा&comma; कोल्ड चेन&comma; प्रशिक्षण&comma; बीमा तथा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग करता रहा है। यदि सरकार समय पर वित्तीय सहायता एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए तो लाखों मछुआरा परिवार आत्मनिर्भर बन सकते हैं और राज्य के मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि सरकार यदि वास्तव में मछुआरों का विकास चाहती है तो पंचायत स्तर पर नई समितियों के गठन की बजाय प्रखंड स्तरीय सहकारी समितियों को सशक्त बनाए&comma; जर्जर तालाबों का जीर्णाेद्धार कराए&comma; नए जलाशयों का निर्माण करे&comma; सरकारी तालाबों एवं जलाशयों की बंदोबस्ती सहकारी समितियों को प्राथमिकता के आधार पर दे तथा मछुआरों के लिए रोजगारोन्मुखी योजनाओं का विस्तार करे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉफ्फेड के अध्यक्ष प्रयाग सहनी ने कहा कि पंचायत स्तरीय मछुआ समिति के गठन के प्रस्ताव को अविलम्ब वापस लिया जाए। आगे उन्होने कहा कि मछुआरा समाज केवल मत्स्य उत्पादन का माध्यम नहीं&comma; बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा&comma; ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता आंदोलन की मजबूत आधारशिला है। इसलिए सरकार को ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए जो मछुआरों को आत्मनिर्भर बनाएँ&comma; उनके पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करें और नई पीढ़ी को मत्स्य व्यवसाय से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करें।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह में उपस्थित अतिथियों ने भी मछुआरा समाज की समस्याओं पर अपने विचार व्यक्त किए तथा सहकारिता आधारित मत्स्य विकास मॉडल को और अधिक मजबूत बनाने पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए कॉफ्फेड की निदेशक सिमरन ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों&comma; पत्रकार बंधुओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि कॉफ्फेड मछुआरा समाज के अधिकारों&comma; सम्मान एवं आजीविका की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करता रहेगा तथा राज्य एवं केंद्र सरकार के समक्ष उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाता रहेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह में निदेशक मदन कुमार&comma; लाल बाबू सहनी&comma; दिनेश सहनी&comma; कपिलदेव सहनी&comma; कुमार शुभम&comma; अभिलाष कुमार&comma; सानिध्या राज&comma; इंदर मुखिया&comma; शिव नंदन प्रसाद&comma; राकेश कुमार&comma; नरेश प्रसाद सहनी&comma; निरंजन कुमार&comma; प्रदीप सहनी&comma; अरूण सहनी&comma; लालो सहनी एवं नरेश सहनी ने अपने विचार व्यक्त किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर कॉफ्फेड के पदाधिकारीगण् रवि राज&comma; राहुल कुमार&comma; दयानंद कुमार&comma; प्रमोद कुमार रजक&comma; मोनू कुमार&comma; मो० मोनव्वर अली&comma; विभूति भूषण प्रसाद&comma; रानी सहनी&comma; अमृतेश कुमार&comma; राकेश कुमार&comma; मनोज कुमार एवं रवि सहनी के साथ-साथ बड़ी संख्या में मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के प्रतिनिधि&comma; जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;

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