हाथीपांव से ग्रसित फाइलेरिया मरीजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र मिलने की हुई शुरुआत

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">कटिहार&lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> 27 जून। फाइलेरिया बीमारी से ग्रसित मरीजों को जीवनभर विकलांग की तरह अपना जीवनयापन करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में भी उन्हें विकलांगता की श्रेणी में नहीं रखा गया था जिसके कारण उन्हें जीवनभर योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ता था। लेकिन अब हाथीपांव से ग्रसित मरीजों के जीवन की जानकारी सरकार तक पहुँचने पर सरकार द्वारा भी उन्हें दिव्यांगता की श्रेणी में शामिल करना स्वीकृत किया गया है। इसका लाभ उठाते हुए मंगलवार को जिले के 03 हाथीपांव से ग्रसित फाइलेरिया मरीजों को सदर अस्पताल&comma; कटिहार में दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> इसमें 02 मरीज कोढ़ा प्रखंड के व 01 मरीज बरारी प्रखंड के फाइलेरिया उन्मूलन के लिए कार्यरत नेटवर्क मेंबर हैं जिन्हें दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया। इससे हाथीपांव ग्रसित मरीजों के चेहरे पर बहुत ही खुशियां दिखाई दी। दिव्यांगता प्रमाणपत्र लेते हुए मरीजों ने कहा कि पिछले कई सालों से वे हाथीपांव की समस्या से ग्रसित रहे हैं&comma; लेकिन किसी भी सरकारी योजनाओं में उन्हें इसका विशेष लाभ नहीं मिल रहा था । <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्हें सामान्य लोगों की तरह ही सभी योजनाओं में भागीदार बनाया जाता था। हाथीपांव की बीमारी जीवनभर पूरी तरह ठीक तो नहीं हो सकती लेकिन अब दिव्यांगता प्रमाणपत्र के मिलने से उनका जीवन थोड़ा आसान जरूर हो सकेगा और उन्हें सरकारी दिव्यांग योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। सिविल सर्जन डॉ&period; जितेन्द्र नाथ सिंह द्वारा जिले के अन्य हाथीपांव ग्रसित फाइलेरिया मरीजों को भी दिव्यांगता प्रमाणपत्र लेने के लिए आवेदन करने और दिव्यांग लोगों को मिलने वाले सभी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की गई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>हाथीपांव की गंभीरता के आधार पर मरीजों को मिलेगा दिव्यांगता प्रमाणपत्र &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ&period; जे&period; पी&period; सिंह ने बताया कि राज्य निःशक्ता आयुक्त के दिशा निर्देश पर अब हाथीपांव से ग्रसित मरीजों को भी दिव्यांगता की श्रेणी में शामिल किया गया है। हाथीपांव के मरीजों को गंभीरता के आधार पर श्रेणी का निर्धारण करके उनके अनुसार दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिया जाना है। इसके लिए ग्रेड तय किया गया है। जिसके अनुसार हाथीपांव ग्रसित मरीजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने की शुरुआत की गई है। दिव्यांगता प्रमाणपत्र मिलने पर अब हाथीपांव से ग्रसित फाइलेरिया मरीज भी राज्य तथा केंद्र सरकार द्वारा दिव्यांगजनों को मिलने वाली योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसमें रेलवे यात्रा&comma; आरक्षण व ऐसी ही अन्य प्रकार की दिव्यांग सुविधाओं का लाभ हाथीपांव ग्रसित मरीज उठा सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>हाथीपांव के चार ग्रेड के मुताबिक होगा दिव्यांगता का निर्धारण &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यूडीआईडी जिला कोऑर्डिनेटर साकेत कुमार द्वारा मंगलवार को जिले के तीनों हाथीपांव ग्रसित मरीजों को ग्रेड 03 का प्रमाणपत्र जारी किया गया। इस दौरान साकेत कुमार ने बताया कि हाथीपांव ग्रसित मरीजों को चार ग्रेड के मुताबिक दिव्यांगता निर्धारित किया जाएगा। इसमें ग्रेड 03 से ऊपर वाले मरीजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए मरीजों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के बाद आवेदन प्रमाणपत्र लेकर नजदीकी अस्पताल में अपनी जांच करवानी होगी। जांच के बाद सदर अस्पताल दिव्यांगता कार्यालय में उसकी स्थिति की पहचान की जाएगी। उसके बाद उन्हें ग्रेड के अनुसार दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। सभी हाथीपांव से ग्रसित मरीज इसका लाभ उठा सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;

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