एम्स पटना आई बैंक द्वारा नेत्रदान जागरूकता पदयात्रा का आयोजन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारी शरीफ&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> 40वें नेत्रदान पखवाड़े &lpar;25 अगस्त से 8 सितंबर 2025&rpar; के अवसर पर एम्स पटना आई बैंक ने नेत्र विज्ञान विभाग के तत्वावधान में 3 सितंबर 2025 को नेत्रदान जागरूकता पदयात्रा का आयोजन किया&period; इस कार्यक्रम का उद्देश्य नेत्रदान को बढ़ावा देना&comma; कॉर्नियल अंधता को समाप्त करने के लिए जन जागरूकता बढ़ाना और नेत्रदान की शपथ लेने के महत्व को उजागर करना था&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह पदयात्रा सुबह 08&colon;30 बजे ओपीडी फोयर से शुरू हुई&comma; जो गेट नंबर 1 से बाहर निकली&comma; पटना-औरंगाबाद सड़क से होते हुए गेट नंबर 4 से परिसर में दोबारा प्रवेश कर आईपीडी बिल्डिंग पर समाप्त हुई&period; इस कार्यक्रम में 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया&comma; जिनमें विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य&comma; सीनियर रेजिडेंट&comma; जूनियर रेजिडेंट&comma; इंटर्न&comma; नर्सिंग ऑफिसर और अन्य स्टाफ शामिल थे&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; अमित राज ने नेत्रदान में अधिक जनभागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया&comma; जिससे कॉर्नियल प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा अवधि कम की जा सके&period; उन्होंने जनता को नेत्रदान की प्रक्रिया&comma; भ्रांतियों और महत्व के बारे में जानकारी दी&period; वे इस पदयात्रा के नेतृत्वकर्ता भी रहे&period; उन्होंने यह भी बताया कि एम्स पटना में आई बैंक 30 अप्रैल 2025 से सक्रिय रूप से कार्यरत है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; सौरभ वार्ष्णेय ने इस पहल की सराहना की और इसे समुदाय में जागरूकता एवं सहभागिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीन &lpar;शैक्षणिक प्रभारी&rpar; एवं डीन &lpar;अनुसंधान&rpar; प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; संजय पांडे ने कहा कि यह प्रयास कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सेवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है&period; हालांकि लोगों की रुचि नेत्रदान में बढ़ रही है&comma; लेकिन जागरूकता की कमी अब भी बनी हुई है&comma; जिसे दूर करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ&period; सोनी सिन्हा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और पदयात्रा का नेतृत्व किया&period; उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन और समन्वय में प्रमुख भूमिका निभाई&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम के अंत में सहायक प्रोफेसर डॉ&period; अमित कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी प्रतिभागियों&comma; फैकल्टी व सहायक स्टाफ का आभार व्यक्त किया&period;<&sol;p>&NewLine;

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