एम्स पटना में नेत्रदान जागरूकता पदयात्रा, अब तक 112 नेत्रदान प्राप्त

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत एम्स पटना के नेत्र विज्ञान विभाग की ओर से बुधवार को नेत्रदान जागरूकता पदयात्रा निकाली गई&period; लगातार हो रही बारिश के बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों का उत्साह कम नहीं हुआ&period; बारिश के कारण पदयात्रा को ओपीडी फोयर से आईपीडी कनेक्टिंग कॉरिडोर होते हुए आईपीडी फोयर तक ले जाया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में एम्स पटना के विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य&comma; रेजिडेंट डॉक्टर&comma; नर्सिंग कर्मी&comma; आई बैंक काउंसलर और अन्य कर्मचारियों ने भाग लेकर लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया&period; कार्यक्रम की शुरुआत नेत्र विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो&period; डॉ&period; अमित राज के स्वागत संबोधन से हुई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>एम्स आई बैंक को मिल चुके हैं 112 नेत्रदान-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रो&period; डॉ&period; अमित राज ने बताया कि मई 2025 में एम्स पटना आई बैंक की स्थापना के बाद से अब तक 112 नेत्रदान प्राप्त किए जा चुके हैं&period; उन्होंने कहा कि देश में डोनर कॉर्निया की आवश्यकता और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है&period; भारत में कॉर्नियल अंधत्व की समस्या से निपटने के लिए करीब 2&period;5 लाख कॉर्निया की आवश्यकता होती है&comma; जबकि वर्तमान में लगभग 50 हजार कॉर्निया ही एकत्रित हो पाते हैं&period; इस अंतर को कम करने के लिए जनजागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करना जरूरी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>नेत्रदान से किसी के जीवन में लौट सकती है रोशनी-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने पदयात्रा का नेतृत्व किया&period; उन्होंने लोगों से मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की&period; उन्होंने कहा कि नेत्रदान महान मानवीय कार्य है और डोनर कॉर्निया की उपलब्धता बढ़ाने के लिए समाज की भागीदारी जरूरी है&period; उन्होंने कम समय में 112 नेत्रदान प्राप्त करने के लिए एम्स पटना आई बैंक की टीम को बधाई दी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीन एकेडमिक प्रो&period; डॉ&period; पूनम भदानी ने आई बैंक टीम और नेत्र विज्ञान विभाग के प्रयासों की सराहना की&period; डीन स्टूडेंट अफेयर्स प्रो&period; डॉ&period; रुचि सिन्हा ने कहा कि कॉर्नियल अंधत्व का बोझ कम करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं&period; मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो&period; डॉ&period; प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि नेत्रदान के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है&comma; ताकि जरूरतमंद मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण का लाभ मिल सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पदयात्रा में प्रो&period; डॉ&period; अनूप कुमार&comma; प्रो&period; डॉ&period; अजीत कुमार&comma; डॉ&period; आनंद राय&comma; डॉ&period; अभ्युदय कुमार&comma; डॉ&period; नीरज कुमार&comma; प्रो&period; डॉ&period; अनिल कुमार&comma; डॉ&period; राजीव स्वर्ण&comma; डॉ&period; आसिम सरफराज&comma; डॉ&period; रतीश नायर सहित विभिन्न विभागों के चिकित्सक और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए&period; नेत्र विज्ञान विभाग की ओर से डॉ&period; भवेश चंद्र साहा&comma; डॉ&period; देव कांत और डॉ&period; अमित कुमार समेत सीनियर रेजिडेंट&comma; जूनियर रेजिडेंट&comma; नर्सिंग स्टाफ&comma; आई बैंक काउंसलर और अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का संचालन और समन्वय नेत्र विज्ञान विभाग की अपर प्रोफेसर डॉ&period; सोनी सिन्हा ने किया&period; पदयात्रा के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि नेत्रदान किसी जरूरतमंद के जीवन में दृष्टि और उम्मीद की रोशनी ला सकता है&period; प्रतिभागियों ने लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने तथा परिवार और समाज के बीच इसके प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की।<&sol;p>&NewLine;

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