एक-एक पल है अनमोल : नवजात शिशुओं को जीवनदान देने के लिए एम्स पटना ने ‘हेल्थकेयर हीरोज़’ को किया सशक्त

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> जीवन के शुरुआती&comma; बेहद नाज़ुक पलों में एक नवजात शिशु की पहली किलकारी दुनिया की सबसे मधुर ध्वनि होती है लेकिन कभी-कभी&comma; इसे सुनना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। उन पहली और अहम साँसों के मोल को गहराई से समझते हुए&comma; एम्स पटना के नियोनेटोलॉजी विभाग ने इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स &lpar;IAP&rpar; के साथ मिलकर 28 मार्च&comma; 2026 को &&num;8216&semi;बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन ट्रेनिंग-ऑफ-ट्रेनर्स &lpar;NRP ToT&rpar;&&num;8217&semi; नामक एक परिवर्तनकारी कार्यशाला का आयोजन किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस एक-दिवसीय गहन और व्यावहारिक प्रशिक्षण में हिस्सा लेने के लिए डॉक्टर्स और नर्सिंग अधिकारी एकजुट हुए&comma; जहाँ कक्षाओं को बिल्कुल वास्तविक &&num;8216&semi;सिमुलेटेड डिलीवरी रूम&&num;8217&semi; का रूप दे दिया गया था। प्रतिभागियों ने वास्तविक जीवन जैसी परिस्थितियों का सामना किया और &&num;8216&semi;पेरिनाटल एस्फिक्सिया&&num;8217&semi; से निपटने के जीवनरक्षक उपायों में महारत हासिल की&comma; जो भारत में नवजात मृत्यु दर का एक बड़ा कारण है। कार्यशाला के केंद्र में जन्म के तुरंत बाद का वह सबसे अहम &&num;8220&semi;गोल्डन मिनट&&num;8221&semi; रहा&comma; जहाँ त्वरित आकलन और रिससिटेशन की अचूक तकनीकें किसी नन्हे जीवन को बचा सकती हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाते हुए एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने इस प्रशिक्षण को महज़ कक्षाओं तक सीमित न रखकर ज़मीनी हकीकत में बदलने की ज़रूरत पर प्रकाश डाला और प्रतिभागियों को अपना ज्ञान दूर-दूर तक फैलाने के लिए प्रेरित किया। डीन अकादमिक प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; पूनम प्रसाद भदानी और चिकित्सा अधीक्षक प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; अनूप कुमार ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस अवसर को सुशोभित किया। आईएपी &lpar;IAP&rpar; बिहार राज्य शाखा के अध्यक्ष प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; निगम प्रकाश नारायण ने इस शानदार पहल की सराहना करते हुए कहा कि नवजात देखभाल को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कौशल-विकास तथा अकादमिक जुड़ाव आज के वक्त की सबसे बड़ी माँग है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस कार्यशाला का सफल नेतृत्व डॉ&period; ओम प्रकाश ने किया और इसका समन्वय डॉ&period; रिची दलाई द्वारा किया गया। उन्हें डॉ&period; अमित कुमार&comma; डॉ&period; भावेश कांत चौधरी&comma; डॉ&period; रामेश्वर प्रसाद और डॉ&period; केशव कुमार पाठक जैसे दिग्गज विशेषज्ञों के पैनल का बहुमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इन विशेषज्ञों की संयुक्त दक्षता ने यह सुनिश्चित किया कि प्रतिभागियों ने न सिर्फ तकनीकी बारीकियां सीखीं&comma; बल्कि असल ज़िंदगी की मेडिकल इमरजेंसी से बिना घबराए निपटने के लिए ज़रूरी आत्मविश्वास और सूझबूझ का भी विकास किया। केरल और पश्चिम बंगाल जैसे दूर-दराज के राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी इस प्रशिक्षण को प्राप्त कर &&num;8216&semi;बेसिक एनआरपी ट्रेनर&&num;8217&semi; के रूप में नई ज़िम्मेदारी संभाली।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस कार्यशाला को जो बात सबसे अलग और खास बनाती है&comma; वह है इसका सेवाभाव और आपसी सहयोग का जज़्बा। कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों ने दृढ़ संकल्प लिया कि वे खुद &&num;8216&semi;ट्रेनर&&num;8217&semi; बनकर अपने-अपने संस्थानों में ऐसे ही सत्र आयोजित करेंगे। इसका मकसद इस ज्ञान के प्रभाव को कई गुना बढ़ाना और कुशल स्वास्थ्य कर्मियों का एक ऐसा मजबूत नेटवर्क तैयार करना है जो नवजात शिशुओं के जीवन की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित हों।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह कार्यशाला महज़ एक प्रशिक्षण नहीं&comma; बल्कि एक अटल वादा था&colon; इस बात का कि हर बच्चे को अपनी पहली सांस लेने का&comma; सुरक्षित जीने का और असीम संभावनाओं से भरे भविष्य का पूरा हक़ है। ऐसी अनूठी पहलों के ज़रिए&comma; एम्स पटना एक ऐसे भविष्य की नींव रख रहा है जहाँ जीवन के उन पहले पलों का स्वागत पूरी तैयारी&comma; अचूक कौशल और करुणा के साथ किया जाए&comma; ताकि हर बच्चे के लिए एक &&num;8216&semi;सुरक्षित शुरुआत&&num;8217&semi; का सपना हकीकत की ओर एक कदम और करीब आ सके।<&sol;p>&NewLine;

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