हृदय संबंधी रोग से ग्रसित आठ बच्चे जरूरी जांच के लिये पटना रवाना

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong> राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा हृदय रोग से ग्रसित जिले के 08 बच्चों को जरूरी जांच के लिये मंगलवार को राजधानी पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान भेजा गया है। जहां बीमार बच्चों के सभी जरूरी जांच के उपरांत उन्हें समुचित इलाज के लिये आरबीएसके द्वारा गुजरात के अहमदाबाद स्थित सत्य श्री साई हृदय रोग संस्थान भेजा जायेगा। जहां बच्चों का नि&colon;शुल्क इलाज संभव हो सकेगा। इलाज पर आने वाले तमाम खर्च के साथ-साथ बीमार बच्चे व उनके अभिभावकों को परिवहन मद में होने वाला खर्च भी बिहार सरकार द्वारा वहन किया जायेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>रोगग्रस्त बच्चों का होता है नि&colon;शुल्क इलाज<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला समन्वयक डॉ प्रशांत कुमार झा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विभिन्न रोग से ग्रसित 0 से 18 साल तक के बच्चों के नि&colon;शुल्क जांच व इलाज का प्रावधान है। योजना के तहत बच्चों में होने वाले कुल 38 तरह के रोगों का नि&colon;शुल्क इलाज किया जाता है। इसमें चर्मरोग&comma; दांत व आंख संबंधी रोग&comma; टीबी&comma; एनीमिया&comma; हृदय संबंधी रोग&comma; श्वसन संबंधी रोग&comma; जन्मजात विकलांगता&comma; बच्चे के कटे होंठ व तालू संबंधी रोग शामिल हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संचालित मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना की मदद से हृदय संबंधी विभिन्न बीमारियों से ग्रसित बच्चों का उपचार बेहद आसान हो चुका है। योजना का लाभ उठा कर जिले के दर्जनों बच्चे सेहतमंद जींदगी बसर कर रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>हृदय रोगी बच्चों के लिये वरदान है मुंख्यमंत्री बाल हृदय योजना<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डीपीएम स्वास्थ्य संतोष कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संचालित मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत हृदय रोग से ग्रसित बच्चों के नि&colon;शुल्क इलाज का प्रावधान है। इसे लेकर आरबीएसके की टीम द्वारा बीमार बच्चों को पहले चिह्नित किया जाता है। चिह्नित बच्चों की सूची वरीय संस्थान को भेजा जाता है। वहां काउंसिलिंग के बाद बीमार बच्चों को जरूरी इलाज के लिये बेहतर चिकित्सा संस्थान भेजा जाता है। इलाज पर आने वाला सारा खर्च के साथ आने-जाने में होने वाला परिवहन खर्च भी सरकार वहन करती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नियमित अंतराल पर होता है स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित<br &sol;>सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम सरकार के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं में शुमार है। रोगग्रस्त बच्चों को चिह्नित करने के लिये आरबीएसके की टीम द्वारा पहले बच्चों का जरूरी स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इसके लिये 0 से 6 साल तक के बच्चों में रोग का पता लगाने के लिये आंगनबाड़ी स्तर पर व 6 से 18 साल तक के बच्चों में रोग का पता लगाने के लिये विद्यालय स्तर पर नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किये जाने की जानकारी उन्होंने दी।<&sol;p>&NewLine;

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