जिले में आरोग्य मंदिर के सफल क्रियान्वयन की कवायद हुई तेज

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong> सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों तक जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पहले से बेहतर हुआ है। इसमें जिले में संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के नाम केंद्र सरकार द्वारा बदलाव किया गया है। इसे अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर के नाम से जाना जाता है। गौरतलब है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर के सफल संचालन से प्रारंभिक अवस्था में गंभीर रोगों का पता लगाने&comma; इसका उपचार सुनिश्चित कराने&comma; मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती सहित विभिन्न एनसीडी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संबंधी उपायों को मजबूती मिली है। इसे अधिक उपयोगी बनाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा जरूरी कवायद जारी है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में संचालित सभी आरोग्य मंदिर पर उपलब्ध सुविधाएं&comma; स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मियों की प्रतिनियुक्ति&comma; भवन&comma; स्वच्छ&comma; पेयजल&comma; शौचालय&comma; रोगियों के बैठने संबंधी इंतजाम का आकलन करते हुए इसके सुदृढीकरण का प्रयास किया जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>समय पर रोग की पहचान व उपचार हुआ है आसान<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर ओपीडी सेवा&comma; एनसीडी स्क्रीनिंग&comma; टेलीमेडिसिन&comma; एएनसी जांच&comma; परिवार नियोजन संबंधी सेवा व परामर्श सेवाओं का लाभ लोगों को सहजता पूर्वक उपलब्ध कराया जा रहा है। वेलनेस सेंटरों पर प्रत्येक सप्ताह आयोजित होने वाला विशेष स्वास्थ्य मेला स्थानीय ग्रामीणों के लिये विशेष उपयोगी साबित हो रहा है। साथ ही विभिन्न संक्रामक व गैर संक्रामक रोगों के प्रति लोगों को जागरूक करने में भी आरोग्य मंदिर की भूमिका अहम साबित हो रही है। लिहाजा इसके सुदृढीकरण को लेकर जिले में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर अधिकारी व कर्मियों को खासतौर पर निर्देशित किया गया है। साथ ही इसका नियमित अनुश्रवण व मॉनेटरिंग भी किया जा रहा है। इतना ही नहीं जिले के चिह्नित आरोग्य मंदिरों को एनक्वास के निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करते हुए इसके प्रमाणीकरण को लेकर भी जरूरी पहल की जा रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>चिह्नित कमियों को दूर करने की हो रही पहल<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>जिला योजना समन्वयक राकेश कुमार ने बताया कि जिले में कुल 251 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। इसमें से कुल 62 स्थानों पर सुरक्षित प्रसव संबंधी तमाम जरूरी इंतजाम उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिये आरोग्य मंदिरों का सफल संचालन जरूरी है। लिहाजा जिले के सभी आरोग्य मंदिरों के अद्यतन स्थिति का आकलन किया गया है। चिकित्सा अधिकारी व स्टाफ नर्स की उपलब्धता&comma; संचालित सेंटर के भवनों की अद्यतन स्थिति&comma; स्वच्छ पेयजल&comma; शौचालय सहित संस्थागत व आधारभूत संरचना के स्तर पर चिह्नित कमियों को विभागीय स्तर से दूर करने को लेकर जरूरी पहल जिले में शुरू हो चुकी है<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>स्वास्थ्य सेवाओं आसान हुई है लोगों की पहुंच<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी व सफल क्रियान्वयन में आरोग्य मंदिर की भूमिका का नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम संतोष कुमार ने बताया कि आरोग्य मंदिर का सफल संचालन विभागीय प्रमुखताओं में शामिल है। इससे आम लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान हुई है। वहीं बड़े संस्थानों पर मरीजों का दबाव भी कम हुआ है। इससे बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सेवाओं में गुणात्मक सुधार संभव हो सका है। आरोग्य मंदिर की मदद से सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाके में बसे लोगों को 14 तरह के डायगोनेस्टिक संवाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जा रही है। कुछ एक स्थानों को छोड़ कर शेष स्थानों पर ये सभी सेवाएं उपलब्ध भी है। इसी तरह अनिवार्य दवाओं की सूची में शामिल कुल 150 दवाओं में से फिलहाल आरोग्य मंदिरों पर 90 से 100 तरह की दवाएं आम लोगों को सहजता पूर्वक उपलब्ध है।<&sol;p>&NewLine;

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