सारणाथ–वाराणसी का शैक्षणिक भ्रमण सम्पन्न

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> प्राचीन इतिहास&comma; संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग&comma; पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय&comma; पटना द्वारा 26–27 नवम्बर 2025 को सारनाथ एवं वाराणसी का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहर का प्रत्यक्ष अध्ययन कराना था। कुल 35 विद्यार्थियों ने इस अध्ययन यात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विभागाध्यक्ष प्रो&period; कनक भूषण मिश्रा के निर्देशन में यात्रा का शुभारम्भ 26 नवम्बर की सुबह पटना से हुआ। निर्धारित समय पर सभी छात्र–छात्राएँ एवं शिक्षक एकत्र होकर वाराणसी के लिए रवाना हुए। मार्ग में शिक्षकों द्वारा सारनाथ और वाराणसी के ऐतिहासिक महत्व&comma; बौद्ध धर्म के विकास तथा पुरातात्विक धरोहरों की पृष्ठभूमि पर परिचयात्मक जानकारी दी गई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वाराणसी पहुँचने पर विद्यार्थियों ने धमेक स्तूप&comma; अशोक स्तंभ अवशेष&comma; मृगदाय वन&comma; मूलगंधकुटी विहार&comma; बौद्ध मंदिर&comma; बोधि वृक्ष&comma; सारनाथ संग्रहालय और जैन मंदिर सहित विभिन्न स्थलों का अवलोकन किया। बताया गया कि सारनाथ वही पवित्र स्थल है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद प्रथम उपदेश &OpenCurlyQuote;धर्मचक्रप्रवर्तन’ दिया था। संग्रहालय में अशोक सिंह–शीर्ष &lpar;भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का मूल&rpar;&comma; धम्मचक्र अवशेष&comma; गुप्तकालीन उत्कृष्ट प्रतिमाएँ तथा धम्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा में बुद्ध की प्रसिद्ध प्रतिमा विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र रही।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संग्रहालय में प्रदर्शित कलावस्तुओं के कलात्मक स्वरूप&comma; शैली&comma; तिथि-निर्धारण एवं सांस्कृतिक महत्त्व पर विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ&period; तृप्ति राय ने विस्तृत जानकारी दी। विद्यार्थियों ने वाराणसी के प्रमुख घाटों&comma; मंदिरों तथा काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर &lpar;बाहरी अवलोकन&rpar; का भी अध्ययनात्मक भ्रमण किया। दो दिवसीय इस शैक्षणिक यात्रा ने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने वाले विषयों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान किया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>भ्रमण के दौरान सारनाथ की कला–शैली&comma; बौद्ध प्रतीकात्मकता&comma; गुप्तकालीन धरोहर और वाराणसी की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं का विद्यार्थियों ने गहन निरीक्षण किया&comma; जो उनके शैक्षणिक विकास हेतु अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में सेमेस्टर तृतीय के विद्यार्थी रौशन&comma; प्रिया&comma; नीरज&comma; शिवानी&comma; नव्या&comma; अनूप&comma; रोहित&comma; पीयूष&comma; आशीष&comma; सुरजीत&comma; अंकित&comma; सपना&comma; पूनम&comma; खुशबू&comma; ज्योति&comma; मोनी&comma; राजनंदिनी आदि ने सक्रिय भागीदारी की। विभागीय शिक्षकों के सहयोग और छात्रों के उत्साह से यह शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।<&sol;p>&NewLine;

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